डा. बीआरए यूनीवर्सिटी के प्राइवेट कालेजों की एक और कारस्तानी सामने आई है। इस बार कालेजों ने परीक्षकों के दिए अंकों के स्थान पर खुद की ओर से तैयार मनमाने अंकों का लिफाफा यूनीवर्सिटी में जमा करा दिया। इसमें सभी छात्रों को 90 फीसदी से अधिक अंक दिए गए हैं।
विश्वविद्यालय से 770 कालेज जुड़े हुए हैं। इसमें 14 एडेड कालेजों को छोड़ बाकी प्राइवेट हैं। करीब 120 कालेजों ने प्रैक्टीकल के नंबर नहीं भेजे। इससे परिणाम तैयार करने में हो रही देरी को देख विश्वविद्यालय ने कालेजों को रिजल्ट रोकने का नोटिस भेजा। नोटिस मिलते ही कालेजों ने अपने द्वारा दिए गए मनमाने नंबरों की सीट विवि को भेज दी। विवि ने इन नंबरों से छात्रों का रिजल्ट तैयार किया तो गड़बड़ी पकड़ में आ गई। 17 कालेजों ने जो सीट भेजी उसमें सभी छात्रों को 90 प्रतिशत अंक दिए गए थे। विवि अब इन कालेजों में गए प्रैक्टीकल पैनल के शिक्षकों से भी पड़ताल कर रहा है। कुलसचिव केएन सिंह का कहना है कि प्रैक्टीकल में मनमाने अंक देकर डाटा जमा करने की शिकायत पर जांच कराई जा रही है।
पकड़े जा चुका है फर्जी परीक्षकों का पैनल
बीते सत्र परीक्षकों का फर्जी पैनल भी पकड़ में आया था। इस पैनल ने 14 कालेजों में प्रैक्टीकल करा डाले। एडेड कालेज के शिक्षकों की शिकायत पर पोल खुली। इसमें कालेजों की मिलीभगत सामने आई, दोबारा से प्रैक्टीकल कराए गए।
यह है प्रक्रिया
विश्वविद्यालय की संस्तुति पर परीक्षकों का पैनल कालेज जाता है। पैनल प्रयोगात्मक परीक्षा के बाद अंक देता है। यह शीट सीलबंद लिफाफे में रहती है। लिफाफे को कालेज ही विश्वविद्यालय जमा कराता है।