अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि प्रवेश समिति की ओर से 25 अप्रैल को पारित नियमावली में कई प्रावधान विश्वविद्यालय अधिनियम, यूजीसी दिशा-निर्देशों और शासनादेश के विपरीत हैं। पंजीकरण शुल्क 10 से बढ़ाकर 25 रुपये कर दिया गया है। उपाधि शुल्क 200 से बढ़ाकर 300 रुपये किया गया जो प्रथम सेमेस्टर में ही वसूला जा रहा है।
आरोप लगाया कि इनक्यूबेशन और आईसीटी जैसी सुविधाओं का लाभ सभी छात्रों को नहीं मिलता, फिर भी इसे प्रतिवर्ष अनिवार्य शुल्क के रूप में वसूला जा रहा है। इसी तरह कई कॉलेजों में आईसीटी की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, इसके बावजूद छात्रों से शुल्क लिया जा रहा है। शासन की ओर से 30 प्रतिशत सीट वृद्धि के एवज में संबद्ध महाविद्यालयों से प्रति पाठ्यक्रम 10 हजार वसूले जा रहे हैं और इसकी कोई आधिकारिक रसीद भी नहीं दी जाती है।
फुपुक्टा ने शुल्क वापसी नीति को भी यूजीसी की फीस रिफंड पॉलिसी 2019 के विपरीत बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन छात्र एवं शिक्षक हित में आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।