आगरा के डीएम एनजी रवि कुमार, एसएसपी बबलू कुमार
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जन शिकायतों के निस्तारण की तय कसौटी पर जिलाधिकारियों व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों की दिसंबर की रैकिंग जारी कर दी गई है। इसमें आगरा जिलाधिकारी फिसड्डी रहे हैं। 75 जिलों में उनकी 72वीं रैंक आई है। वहीं आगरा के एसएसपी को नंबर वन रैंक मिली है।
छोटे जिलों में शामिल एटा, हापुड़, बागपत जैसे जिलों की रैंक आगरा से बहुत अच्छी है। वैसे इसमें कुछ भी चौंकाने वाला नहीं है। तहसील दिवस की रिपोर्ट से पहले ही यह लग रहा था कि आगरा की स्थिति बहुत खराब रहने वाली है।
छह छह महीने से लोग चक्कर काट रहे हैं, उनकी शिकायतों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। हालांकि पुलिस की स्थिति ठीक रही है। आगरा सहित 57 जिलों के एसएसपी की पहली रैंक है।
ऐसे तय होती है रैकिंग
प्रदेश सरकार तहसील दिवसों में आने वाली शिकायतों से लेकर मुख्यमंत्री के पास आने वाली शिकायतों के गुणवत्ता पूर्ण निस्तारण की ऑनलाइन मानीटरिंग कराती है। इसी पर सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का निस्तारण भी देखा जाता है।
शिकायती पत्रों पर तय समय के भीतर कार्यवाही के लिए संबंधित कर्मी को भेजने, तय समय के बाद (डिफॉल्टर संदर्भ) भेजने, उच्चाधिकारी द्वारा निस्तारित शिकायत का परीक्षण कर अपने स्तर पर की गई कार्रवाई व निस्तारण की गुणवत्ता के आधार पर जिलाधिकारियों व पुलिस अधीक्षकों की रैंकिंग तय की जाती है।
एटा, फिरोजाबाद, आगरा, हाथरस सहित 57 जिलों के कप्तान को पहली रैंक मिली है। मैनपुरी के कप्तान फिसड्डी रहे हैं। उन्हें 71वीं रैंक मिली है।
शिकायतकर्ता का संतुष्ट न होना भी कारण
शासन ने शिकायतकर्ता की संतुष्टि व इन कसौटियों पर जिलेवार की गई कार्रवाई का आकलन करते हुए दिसंबर की रैंकिंग जारी कर दी है। आगरा में सीएम पोर्टल पर की गई शिकायतों का भी निस्तारण नहीं हो पा रहा है।
दो महीने पहले यह आरोप भी लगे थे कि पोर्टल पर लिख दिया गया निस्तारित, जबकि मौके पर समस्या का समाधान नहीं हुआ। दौरेठा का मामला ऐसा ही है। यहां सड़क नहीं बनी है। सीएम पोर्टल पर की गई शिकायत निस्तारित बताई जा रही है।