पिछले साल भी भर्ती थे 96 मरीज
- महामारी फैलाने के आरोप में पिछले साल सात अप्रैल 2020 को जब प्रशासन ने श्री पारस अस्पताल सील किया था उन दिनों भी 11 जिलों के 96 मरीज भर्ती थे। जिन्हें कार्रवाई के डर से अस्पताल संचालक ने डिस्चार्ज कर दिया। उनके संपर्क में आए लोग संक्रमित हो गए। जिसके बाद संक्रमण फैलाने और मरीजों का ब्योरा छिपाने के आरोप में डॉ. अरिन्जय जैन व प्रबंधन के विरुद्ध महामारी एक्ट में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस साल फिर वही हुआ। बड़ी संख्या में गैर जिलों के मरीजों को भर्ती कर लिया।
इटावा, मैनपुरी से आते हैं ज्यादा मरीज
- इटावा निवासी राजू सिंह ने बताया कि मैंने अपने बहनोई को बुखार आने पर पहले इटावा में स्थानीय चिकित्सक को दिखाया था। उसी ने हमें श्री पारस में रेफर किया। राजू के बहनोई रिंकू की 27 अप्रैल को श्री पारस अस्पताल में मौत हो गई। मैनपुरी निवासी दुरबीन सिंह के 26 वर्षीय पुत्र सनोज कुमार ने भी मॉकड्रिल कांड के बाद दम तोड़ा। पीड़ित पिता का आरोप हैं कि उन्हें मैनपुरी से यहां रेफर किया था। बताया कि श्रीपारस में सबसे ज्यादा मरीज इटावा और मैनपुरी से ही आते हैं।
एंबुलेंस गिरोह से जुड़े हैं तार
- सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस का कहना है कि श्री पारस अस्पताल के तार गैर जिलों में झोलाछाप व एंबुलेंस गिरोह से जुड़े हैं। जो गरीब व भोले-भाले लोगों को यहां भर्ती कराते हैं। बदले में उन्हें अस्पताल द्वारा कमीशन दिया जाता है। इस काम के लिए संचालक ने पीआरओ रखा है। उन्होंने एसएसपी को पत्र लिख श्रीपारस में मरीजों को रेफर करने वाले कथित चिकित्सकों व एंबुलेंसों की जांच कराने की मांग की है।
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