भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पास मौजूद जानकारी के मुताबिक जहांगीर के बाद शाहजहां ने सादिक खां को 4000 जात का मनसब और 4000 सवार का मनसब प्रदान किया। 3 सितंबर 1633 को सादिक खां के निधन के बाद बेटे सलावत खां ने उनका गैलाना में मकबरा बनवाया।
सिकंदरा स्मारक से दो किमी की दूरी पर है
यह सिकंदरा स्मारक से दो किमी की दूरी पर है। दो साल पहले सादिक खां और सलावत खां मकबरे का संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने कराया है। दोनों स्मारक अपनी अलग-अलग अनूठी वास्तु और निर्माण शैली के बने हैं।