राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजी गई शहर की बहादुर बिटिया नाजिया ने बहादुरी के कई कारनामे दिखाए हैं। छह साल की बच्ची का अपहरण होने से बचाया था। इसके लिए तीन बदमाशों से अकेले भिड़ गई थी। घायल हो गई लेकिन बच्ची को नहीं छोड़ा।
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इससे भी जोखिम भरा कारनामा रहा पड़ोस के दबंगों की दादागिरी बंद कराना। ये लोग न केवल सट्टे और जुए का रैकेट चला रहे थे बल्कि छेड़छाड़ भी करते थे।
इनके खिलाफ कोई बोलता नहीं था, क्योंकि जान का खतरा था। नाजिया से यह देखा न गया। अंजाम की परवाह किए बगैर वह टकरा गई और जुए-सट्टे के अड्डे बंद कराकर दम लिया।
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मामला पिछले साल का है। नाजिया के घर के पास में ही जुए और सट्टे के अड्डे चल रहे थे। दबंग लोग इन्हें चला रहे थे। पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही थी।
नाजिया ने एसएसपी से शिकायत की। इस पर दबंगों ने उसका जीना मुहाल कर दिया। वह घर से निकलती, तो रास्ता रोककर खड़े हो जाते। नौबत यहां तक आई कि परिवार वालों ने उसे बुर्का पहना दिया, ताकि दबंगों की नजर उस पर न पड़ सके।
लेकिन वह कहां मानने वाली थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ट्वीट कर दिया। इस पर भी एक्शन नहीं हुआ तो राष्ट्रीय महिला आयोग से मदद मांगी। आयोग की सदस्य उसके घर जांच के लिए पहुंची।
फिर दबंगो से लिया मोर्चा
आखिर में पुलिस एक्शन में आई। जुए और सट्टे के अड्डे बंद कराए। सटोरियों को हवालात में डाल दिया। नाजिया कहती है कि यह उसके जीवन का सबसे मुश्किल काम रहा।
सटोरियों ने उसके भाइयों के खिलाफ रेप का झूठा केस दर्ज करा दिया था। इसमें उसे भी आरोपी बनाया गया। एक बार तो उसे लगा कि वह हार जाएगी।
दुखी मन से उसने घर पर बोर्ड लगा दिया था कि यह मकान बिकाऊ है लेकिन बाद में लगा किसी न किसी को तो जोखिम उठाना ही होगा। उसने बोर्ड हटाया और दबंगों से मोर्चा लिया।
बहादुर बिटिया के कारनामे
1. सात अगस्त, 2015 को : मंटोला में छह साल की बच्ची का अपहरण होने से बचाया। तीन बदमाश उसे कार में डालने की कोशिश कर रहे थे। नाजिया ने उसका हाथ पकड़ लिया। बदमाशों ने नाजिया को धक्का दिया, वह गिर गई, घायल हो गई, लेकिन बच्ची का हाथ नहीं छोड़ा। आसपास के लोग आने पर बदमाश भाग गए।
2. जून 2017 में पड़ोस में सट्टा और जुआ कराने वाले दबंगों के खिलाफ मोर्चा लिया। उन्हें सबक सिखाया। जुए और सट्टे का अड्डा बंद कराकर दम लिया।
3. सितंबर 2017 में सदर भट्टी में मनचलों को सबक सिखाया। वे स्कूल जाती छात्राओं से छेड़छाड़ करते थे। नाजिया ने पुलिस में शिकायत की। एसएसपी से मिली। मनचलों को पुलिस ने हवालात में डाला।
पहले भी मिले पुरस्कार
नाजिया की बहादुरी की खबर सबसे पहले अमर उजाला ने प्रकाशित की। मामला छह साल की बच्ची का अपहरण होने से बचाने का था। नाजिया को बहादुरी के लिए सबसे पहले अमर उजाला ने ही सम्मानित किया।
-अमर उजाला के अभिनव अभियान मां तुझे प्रणाम के मंच से 15 अगस्त, 2015 को डीएम और एसएसपी ने उसे सम्मानित किया।
-इसके बाद 26 जनवरी, 2016 को उसे पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने बहादुरी के लिए सम्मानित किया।
-आठ मार्च, 2016 को एक टीवी शो में अभिनेता अक्षय कुमार ने उसे बहादुरी के लिए पुरस्कार दिया।
-2016 में ही तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से नवाजा।
नाजिया का सपना आईएएस अधिकारी बनने का है। पुरस्कार पाने के बाद उसने कहा कि वह सिविल सर्विसेज की तैयारी में जी-जान से जुटेगी। अगर उसका सपना सच हुआ तो वह समाज की सेवा करना चाहती है।
वह आगरा कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है। उसने बताया कि इस पुरस्कार ने उसे नया हौसला दिया है। समाज में किसी के साथ भी कुछ भी गलत होता है, तो उसे अच्छा नहीं लगता है। अमर उजाला से बातचीत में उसने कहा कि उसने कभी सोचा नहीं था कि उतना बड़ा पुरस्कार मिलेगा।
तीन तलाक के मुद्दे पर उसका कहना है कि सरकार जो कदम उठा रही है, वह बिल्कुल सही है, कानून बनना चाहिए। तीन तलाक ने महिलाओं की जिंदगी को नरक बना दिया है। हजारों महिलाएं इसकी शिकार हुई हैं। यह कानून बना तो महिलाओं के लिए नई आजादी मिलने जैसा होगा।