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Agra News: चमड़े की कतरन और सिल्ट से भरा मंटोला नाला, ये है वो तस्वीर; जो खोल रही नगर निगम के दावों की पोल

Sat, 09 May 2026 10:10 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा नगर निगम भले ही नाला सफाई के बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन मंटोला नाला अब भी कचरे और सिल्ट से पूरी तरह भरा पड़ा है। अवैध अतिक्रमण और सफाई में लापरवाही के चलते मामूली बारिश में भी पुराने शहर के कई इलाकों में जलभराव हो रहा है।
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मंटोला नाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक अप्रैल से नाला सफाई अभियान शुरू करने का नगर निगम के अधिकारियों ने दावा किया, लेकिन तस्वीरें कुछ और ही कहानी कह रही हैं। मंटोला नाला चमड़े की कतरन और कचरे से पूरा भरा हुआ है। तीन किमी. के नाले में एक फुट जगह भी ऐसी नहीं, जहां पानी नजर आता हो, लेकिन कागजों में यह 80 फीसदी साफ हो चुका है। बिजलीघर चौराहा से सुभाष बाजार के बीच यह नाला पूरी तरह से ढका हुआ है, जिसके ऊपर स्लैब डालकर अवैध दुकानें बनी हुई हैं। इस वजह से नाले की सफाई ही नहीं हुई।
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शहर के सबसे बड़े और गहरे मंटोला नाले समेत शहरभर के नालों की सफाई के दावे अफसर कर रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। दावे 80 फीसदी सफाई के हो रहे हैं, लेकिन अभी तक सफाई आठ फीसदी भी नहीं हुई है। क्षेत्रीय पार्षद और लोग नगर निगम के अधिकारियों पर भड़के हुए हैं। मामूली बारिश में भी गलियों में पानी भर रहा है और मंटोला और काजीपाड़ा नाला सड़क के तल तक पानी और सिल्ट से भरे पड़े हैं। लोगों का सवाल है कि अगर नाले साफ हुए तो पानी का स्तर कम क्यों नहीं हुआ और सिल्ट, कचरा कैसे दिख रहा है।

22 फीट गहरा है मंटोला नाला
मंटोला नाला दरअसल सिंचाई विभाग की नहर का हिस्सा था, जो कभी शहर में माल के परिवहन के लिए इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन नगर विकास के बाद इसे नाले में बदल दिया गया। यह 22 फीट गहरा है। इसके ऊपर अब जूते, चप्पल, कबाड़, कपड़े आदि की दुकानें और फैक्टरियां बना दी गई हैं। यह सभी अवैध हैं। वर्ष 2019 में नाले से बिजलीघर चौराहे पर अतिक्रमण हटवाया गया था, लेकिन फिर से यहां लोहे के गर्डर डालकर दुकानें बना दी गईं। यहां जूते की कतरन से भरे बैग डालने से नाला जाम हो जाता है, जिससे रोशन मोहल्ला समेत पुराने शहर और पीछे वाले हिस्से में जलभराव होता है। यहां कपड़े की दुकानों और बाजार में पानी भरने से करोड़ों रुपये का नुकसान व्यापारी झेल चुके हैं।

 

पार्षदों ने जताया रोष
 मंटोला के पार्षद मो. शहजाद ने बताया कि शहर का सबसे बड़ा और गहरा नाला मंटोला है, लेकिन इसकी सफाई शुरू नहीं की गई। केवल फ्लोटिंग निकाली गई थी। यह सिल्ट से यह भरा हुआ है। हर साल कागजों पर ही इसकी सफाई दिखाई जाती है। जलभराव पूरी पोल खोल देगा। काजीपाड़ा की पार्षद मीना देवी ने बताया कि मेरा घर ही नाला काजीपाड़ा के पास है। मैंने तो नाले की सफाई और सिल्ट हटाने का काम देखा नहीं। अधिकारी लगातार झूठ बोल रहे हैं। मेरे वार्ड में नाले की सफाई नहीं हुई। नगर आयुक्त खुद आकर देख लें कि नाला साफ हुआ या नहीं। 
 
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हटाई जा चुकी सिल्ट
नगर स्वास्थ्य अधिकारी संजीव वर्मा ने बताया कि मंटोला नाला और काजीपाड़ा की 80 फीसदी तक सफाई हो चुकी है। केवल कुछ जगह फ्लोटिंग रह गई है। सिल्ट हटा चुके हैं। अन्य नालों की सफाई भी 30 फीसदी तक हो गई है।  
 
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