जहां एक ओर दिल्ली में पीएम कणों की संख्या 500 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होने पर ट्रकों की आवाजाही रोकने, इमारतों में निर्माण कार्य रोकने, वाहनों का ऑड इवन फार्मूला, सड़क और पेड़ों पर पानी का छिड़काव करने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। दूसरी आगरा में पीएम कणों की मात्रा 500 से ज्यादा होने के बावजूद सप्ताह भर से ताज ट्रिपेजियम जोन अथारिटी वायु प्रदूषण के आपातकाल जैसे हालातों में भी कोई कदम नहीं उठा सकी है।
यही वजह है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में आगरा देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में छठवें नंबर पर रहा। सबसे ज्यादा गाजियाबाद में हालात खराब रहे। एयर क्वालिटी इंडेक्स में गाजियाबाद 456 अंकों के साथ पहले नंबर पर है तो आगरा का वायु गुणवत्ता सूचकांक 391 है। सोमवार के आंकड़ों के मुकाबले इंडेक्स में गिरावट तो आई, लेकिन हवा की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो सका।
वहीं शीत लहर चलने से धूल कणों की संख्या में इजाफा हो गया। बेहद महीन पीएम 2.5 कणों की संख्या 500 के पार हो गई। यह सबसे खराब स्थिति है। ताज ट्रिपेजियम जोन अथारिटी ताजमहल के लिए विजन डाक्यूमेंट तैयार करने के लिए चार जनवरी को बैठक कर रही है, लेकिन वायु प्रदूषण के इस आपातकाल जैसे हालात में पानी का छिड़काव करने और निर्माण कार्यों पर रोक लगाने जैसे कदम नहीं उठा सकी। धूल के कारण ताजमहल का रंग पहले ही बदल चुका है, जिस पर एएसआई शोध कार्य कर रहा है।