उत्तर प्रदेश के आगरा में बैंक प्रबंधक सचिन उपाध्याय हत्याकांड में पुलिस साले कृष्णा रावत को जेल भेज चुकी है। लेकिन 15 दिन में भी आरोपी पत्नी प्रियंका को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। पीड़ित परिजन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि प्राथमिक जांच में साले और पत्नी आरोपी पाए गए हैं। कलेक्ट्रेट बार के अध्यक्ष बृजेंद्र सिंह रावत भी आरोपी हैं। मृतक की पत्नी की तलाश की जा रही है। इसके लिए दबिश भी दी गई है।
रामरघु एग्जॉटिका कॉलोनी, ताजगंज निवासी सचिन उपाध्याय की 11 अक्तूबर को हत्या कर दी गई थी। 12 अक्तूबर को पुलिस को आत्महत्या की सूचना दी गई थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण गला घोंटने से आया था। इस पर मुकदमा दर्ज हुआ। इसमें पत्नी के साथ साले और ससुर को नामजद किया गया था। पुलिस ने मृतक के साले कृष्णा रावत को जेल भेज दिया है। पत्नी प्रियंका और ससुर बृजेंद्र सिंह रावत फरार हैं।
क्राइम सीन को दोहराएगी पुलिस
डीसीपी सिटी सूरज राय ने बताया कि प्रियंका को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस दिया था। मगर, वो पुलिस के सामने नहीं आई हैं। बृजेंद्र सिंह रावत की भी तलाश की जा रही है। कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया जाएगा। गैर जमानती वारंट लिए जाएंगे। विधि विज्ञान प्रयोगशाला को पत्र लिखा गया है। क्राइम सीन को दोहराया जाएगा। इससे भी महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलेंगे।
पुलिस कार्रवाई पर पिता उठा रहे सवाल
बैंक प्रबंधक के पिता केशव देव शर्मा का कहना है कि पुलिस बड़े से बड़े अपराधियों को पकड़ लेती है। मगर, उनके बेटे के हत्यारोपियों को नहीं पकड़ पा रही है। हत्या की घटना को 15 दिन हो चुके हैं। पहले मुकदमा लिखने में देरी की गई। अब गिरफ्तारी में देरी की जा रही है। इससे आरोपियों को बचने का मौका मिल रहा है।
जांच कराने की मांग
उधर, कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बृजेंद्र सिंह रावत का कहना है कि उनके परिवार को फंसाया जा रहा है। उनके साथ साजिश की जा रही है। वह जल्द ही अधिकारियों से मिलकर प्रकरण की जांच सीबीसीआईडी से कराने की मांग करेंगे। दामाद से कोई विवाद नहीं था। गलत आरोप लगाए जा रहे हैं। वह बेटी को इलाज करा रहे हैं। वह पति की मौत से गहरे सदमे में हैं।