10 हजार में रायफल, चार हजार में तमंचा
थानाध्यक्ष न्यू आगरा अरविंद कुमार निर्वाल ने बताया कि आरोपियों ने अपना ठिकाना मऊ गांव के जंगल में यमुना किनारे पर बनाया था। सलीम और अब्दुल सलाम खराद का काम करते हैं। इस कारण तमंचे और रायफल बनाना जानते हैं। सलीम जेल जा चुका है। तब उसकी मुलाकात एक अपराधी से हुई। उसने ही उसे तमंचे बनाना सिखाया था। आकाश ग्राहक लाने का काम करता था। रायफल दस हजार, बंदूक छह हजार और तमंचे तीन से चार हजार रुपये में बेचते हैं।
आरोपियों को पकड़ने के लिए एक सिपाही को ग्राहक बनाया गया। रायफल के रेट लगाए गए। आरोपी दस हजार मांग रहे थे। मगर, सिपाही उनको कम में देने की कहता रहा। इसके बाद उनके ठिकाने तक पुलिस पहुंच गई। सलीम पर आठ, आकाश पर चार और अब्दुल पर तीन मुकदमे दर्ज हैं। हथियारों की बिक्री बड़ी मात्रा में बदमाशों को करते हैं।
मध्य प्रदेश से लेकर आते हैं कारतूस
तत्कालीन एसएसपी अमित पाठक ने वर्ष 2018 में लाइसेंसी असलाह लेने वालों का सत्यापन कराया था। इस दौरान कारतूस की बिक्री को भी देखा था। इसमें पाया गया था कि लाइसेंस धारकों के पास ज्यादा कारतूस चढ़े थे। मगर, सत्यापन में लाइसेंस धारक पर कारतूस नहीं मिले थे। बाद में एसएसपी का स्थानांतरण हो गया।
इसके बाद यह कार्रवाई ठंडे बस्ते में चली गई। इसके बाद शस्त्र की दुकानों पर कारतूस की बिक्री में सख्ती की जाने लगी। थानाध्यक्ष न्यू आगरा ने बताया कि अवैध असलाह बनाने वाले कारतूस मध्य प्रदेश से लेकर आते थे। पूछताछ में यह बात बताई है। इसके बार में और छानबीन की जा रही है।