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लॉकडाउन के जख्म भुलाकर 'रफ्तार' पकड़ रहा पेठा उद्योग, कारीगरों में छाया उल्लास

Fri, 08 Jan 2021 12:18 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

पेठा उद्योग:
  • 500 इकाइयां
  • 200  करोड़ का टर्नओवर।
  • 55 करोड़ का नुकसान 
  • एक लाख लोगों को रोजगार।
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पेठा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ताजमहल पर सैलानियों के बढ़ने के साथ पेठे की भी मिठास बढ़ने लगी है। लॉकडाउन के जख्म भुलाकर उद्योग बड़ी तेजी से रफ्तार पकड़ रहा है। बीते एक माह के अंतराल में कारोबार 50 से 75 फीसदी पर आ गया है। करीब 80 हजार लोगों को दोबारा रोजगार मिलना शुरू हो गया है।
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आगरा का पेठा ताजमहल जितना ही प्रसिद्ध है। लेकिन बीते कुछ माह संकट भरे गुजरे हैं। काम ठप होने से काफी नुकसान हुआ। कारखाने बंद होने से कई लोगों का रोजगार छिन गया। मगर, पिछले कुछ दिनों से पर्यटकों की संख्या में इजाफा होने से राहत मिलनी शुरू हो गई है।

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कारोबार 75 फीसदी पर आया 
पर्यटकों की संख्या बढ़ने से पेठा उद्योग में रौनक आई है। पेठे के अलावा सर्दियों की वस्तुएं जैसे रेवड़ी, गजक की बिक्री हो रही है। कारोबार 75 फीसदी पर आ गया है। - राजेश अग्रवाल, अध्यक्ष शहीद भगत सिंह पेठा कुटीर एसोसिएशन
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कारीगरों को मिलने लगा काम
काम पहले से बेहतर स्थिति में पहुंच गया है। कारखानों में काम तेजी से चल रहा है। ऐसे में कारीगरों भी काम मिलना शुरू हो गया है। - संजीव सिंघल, महामंत्री शहीद भगत सिंह पेठा कुटीर उद्योग

पिछले कुछ माह संकट भरे बीते
मैं पिछले 30 सालों से पेठे के काम से जुड़ा हूं। पिछले कुछ माह संकट भरे बीते। घर चलाना मुश्किल हो गया था। अब काम मिल रहा है। - रामप्रकाश, कारीगर।

दो शिफ्टों में मिल जाते हैं 800 रुपये 
मैं दो शिफ्टों में काम करके खर्च चला रहा हूं। दो शिफ्टों में 800 रुपये तक मिल जाते हैं। छह माह से कोई काम नहीं था। - विजय पाल, कारीगर

एक नजर: पेठा उद्योग
- 500 इकाइयां
- 200  करोड़ का टर्नओवर।
- 55 करोड़ का नुकसान 
- एक लाख लोगों को रोजगार।
 
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