विधानसभा चुनाव 2022 के बाद पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को आगरा आ रहे हैं। शहर ने उन्हें ‘नवरत्न’ दिए हैं। बदले में ढेरों उम्मीदें हैं, लेकिन कुछ जरूरतें वर्षों से अधूरी हैं। शिलान्यास के पांच साल बाद भी यमुना पर रबर डैम नहीं बना। छह साल से सिविल एयरपोर्ट अधूरा है। शिवाजी म्यूजियम, हेलीपोर्ट, स्मार्ट सिटी काम पूरे नहीं हुए। ऐसे में अब आगरा पूछ रहा है, सरकार... कब बनेगा रबर डैम, कब तक अधर में रहेगी हवाई उड़ान। पेश है अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट।
यमुना रबर डैम
पहली बार मुख्यमंत्री बनने पर मई 2017 में जब योगी आगरा आए थे, उन्होंने नगला पैमा में रबर डैम का शिलान्यास किया। करीब 30 लाख रुपये खर्च हुए। पांच साल बाद भी 400 करोड़ रुपये का प्रोजक्ट रबर डैम नहीं बन सका। विभागों से एनओसी नहीं मिलीं। यही हश्र पहले आगरा बैराज का हुआ था। चार दशक में 5 सीएम व 3 राज्यपाल बदल गए, फिर भी बैराज नहीं बना।
अराजक यातायात
19 मई 2020 को सीएम योगी ने 24 घंटे में सड़कों से अवैध ऑटो-बस स्टैंड हटाने, पार्किंग व सड़कों को व्यवस्थित करने के निर्देश डीएम को दिए थे। डीएम ने कार्रवाई के लिए मजिस्ट्रेट तैनात किए। तीन महीने बाद भी नतीजा शून्य है। हाईवे पर सिकंदरा से लेकर वाटरवर्क्स तक रोज जाम लगता है। लोहामंडी, बोदला, शाहगंज, भगवान टॉकीज से अवैध ऑटो-बस स्टैंड नहीं हट सके।
सिविल टर्मिनल
दुनियाभर से लाखों पर्यटक ताजमहल का दीदार करने के लिए आगरा आते हैं। 2015 में रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम के तहत आगरा में नए सिविल टर्मिनल की घोषणा हुई। करीब 400 करोड़ रुपये खर्च होने थे, लेकिन सात साल बाद भी सिविल टर्मिनल नहीं बना।
हेलीपोर्ट प्रोजेक्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में कोठी मीना बाजार मैदान से हेलीपोर्ट प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर करीब पांच एकड़ में बन रहे हेलीपोर्ट पर दो हैंगर प्रस्तावित थे। अक्टूबर 2021 तक काम पूरा होना था, लेकिन बीच में बजट नहीं मिला।
शिवाजी म्यूजियम
2015 में सपा सरकार ने ताजमहल के पास मुगल म्यूजियम का शिलान्यास किया। 130 करोड़ रुपये के इस म्यूजियम का निर्माण 2017 में पूरा होना था। सरकार बदली, 2020 में मुख्यमंत्री योगी ने मुगल म्यूजियम का नाम बदलकर शिवाजी म्यूजियम कर दिया। प्रोजेक्ट की लागत 130 करोड़ रुपये से 186 करोड़ हो गई। करीब 90 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। अब भी म्यूजियम अधूरा है।
आगरा स्मार्ट सिटी
9 जनवरी 2017 को स्मार्ट सिटी प्रा.लि. कंपनी का गठन हुआ। करीब 1100 करोड़ रुपये से 19 कार्य होने थे। 31 अगस्त 2021 तक शहर को स्मार्ट बनाया जाना था। तय मियाद खत्म होने के एक साल बाद भी 16 कार्य हो सके हैं। बेतरतीब खोदाई से शहर की सड़कें व गलियां, मुहल्ले ऊंट की पीठ जैसे हो गए हैं। लोगों के हाथ पैर टूट रहे हैं। गड्ढों में गिरने से लोगों की जान जा रही है। कचरा व सीवर प्रबंधन नहीं हो सका है। जरा सी बारिश में स्मार्ट सिटी तलैया बन जाती है।