12 प्रतिशत ब्याज के साथ देनी होगी रकम
उपभोक्ता फोरम अध्यक्ष नवनीत कुमार ने रेलवे को आदेश दिया कि अधिवक्ता से वसूले गए 20 रुपये पर प्रतिवर्ष 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर से वापस किए जाएं। केस के दौरान अधिवक्ता को हुई मानसिक, आर्थिक और वाद व्यय के लिए 15 हजार रुपये बतौर जुर्माना अदा किया जाएगा।
रेलवे द्वारा यदि निर्णय के 30 दिन के अंदर धनराशि नहीं दी गई तो 20 रुपये पर प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत ब्याज से रकम देनी होगी। अधिवक्ता ने बताया कि रेलवे विंडो क्लर्क ने 20 रुपये अधिक वसूले थे। उस समय विंडो कंप्यूटरीकृत नहीं थी। क्लर्क ने उनको हाथ से बना टिकट दिया था। 21 साल के लंबे संघर्ष के बाद उनकी जीत हुई है।
एडवोकेट तुंगनाथ चतुर्वेदी ने बताया कि 22 साल की लंबी लड़ाई के बाद, अदालत ने मेरे पक्ष में फैसला सुनाया है। रेलवे से मुझे 15,000 रुपये का भुगतान करने के लिए कहा गया है। यह अन्याय के खिलाफ मेरी लड़ाई थी।