यमुना के किनारे बसा यमुनापार इलाका बूंद-बूंद पानी को तरसता है। यहां वर्ष भर पेयजल संकट रहता है। गर्मियों हालात और भी विकट हो जाते हैं। गरीब जनता की इसी जरूरत का दोहन कर रहा है टैंकर माफिया। मनमाने दामों पर पानी बेचता है। टैंकर माफिया का चक्रव्यूह तोड़ने को सरकार ने 33 करोड़ खर्च किए पर नतीजा सिफर रहा है।
यमुनापार इलाके में करीब पांच लाख की आबादी निवास करती है। यहां के आधे हिस्से में जलकल विभाग की सप्लाई है। वह भी नियमित नहीं है। आधा इलाका वर्षों से पानी को तरस रहा है। यहां भूमिगत जल भी खारी है। गर्मियों में यहां पानी के लिए खूनखराबा तक हो जाता है। यहां टैंकर माफिया सक्रिय है जो फाउंड्री नगर के कारखानों से लेकर आम घरों तक पानी पहुंचाता है। क्षेत्र में करीब 150 से अधिक टैंकर हैं जो नाऊ की सराय और आसपास के क्षेत्र में लगे ट्यूबवैल से पानी भरकर उसे मनमानी कीमत पर सप्लाई करता है। इससे निजात दिलाने के लिए क्षेत्रीय विधायक धर्मपाल सिंह के प्रयास से करीब 33 करोड़ की लागत से नाऊ की सराय के पास 16 ट्यूबवैल स्वीकृत हुए। इनमें से 13 लग गए। जबकि तीन के लिए जमीन नहीं मिल पाई है। इन ट्यूबवैल का पानी टेढ़ी बगिया और कालिंदी विहार की टंकियों में पहुंचता है और वहां से क्षेत्र में सप्लाई होती है लेकिन यह योजना कारगर साबित नहीं हो पा रही है।
ट्यूबवैल से इन क्षेत्रों में पानी सप्लाई
टेढ़ी बगिया और कालिंदी विहार की टंकियों से क्षेत्र के कालिंदी विहार, सौ फुटा रोड, इस्लाम नगर, टेढ़ी बगिया, शांति नगर, राहुल नगर, सती नगर, नराइच, भगवती बाग, राधा नगर, जनक विहार सहित कई इलाकों में सप्लाई होती है। इन इलाकों में पानी की लाइन बिछा दी गई है। जनता का कहना है कि कुछ इलाके ऐसे हैं जहां वाल्ब नहीं लगे हैं, जिसकी वजह से उन्हें पानी के लिए भटकना पड़ता है।
क्या कहती है क्षेत्र की जनता
ट्यूबवैल से क्षेत्रों में पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन तो डाल दी गई हैं लेकिन क्षेत्रीय लोगों को पानी नहीं मिल पाता है। नलों में कभी पांच मिनट पानी आता है तो कभीदस मिनट। ऐसे में घर की जरूरत के मुताबिक लोगों को पानी नहीं मिल पाता है।
दिलशाद, क्षेत्रीय निवासी
पानी की समस्या नई बात नहीं है। लोग दशकों से परेशान है। भूमिगत जल खारी है। बोरिंग फेल हो जाते हैं। ट्यूबवैल योजना आई पर यहां स्थिति इतनी खराब है कभी-कभी तो दो-दो दिन तक पानी नहीं आता। लोग भटकते हैं। टैंकर चालक मनमाने दाम मांगते हैं।
अमर सिंह, क्षेत्रीय निवासी
कभी पाइप लाइन लीक हो जाती हैं तो यहां भी गंदा और बदबूदार पानी आता है। इस वजह से टैंकरों से पानी खरीदना पड़ता है। अभी टैंकर संचालक 25 रुपये का एक ड्रम पानी देते हैं और गर्मियों में वही ड्रम 40 से 50 रुपये तक का हो जाता है।
सुमन देवी, क्षेत्रीय निवासी
पूरे इलाके में गरीब और मजदूर रहते हैं।, खाने के लाले हैं। फिर भी पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। कैसे परिवार पालें। नेता आते हैं, वादे करते हैं और चले जाते हैं लेकिन पेयजल की समस्या का अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ है।
गुड्डो, क्षेत्रीय निवासी
अभी से सूखने लगी कालिंदी
आगरा। यमुना का जलस्तर अभी से घटने लगा है। जीवनी मंडी वाटर वर्क्स के ट्रीटमेंट प्लांट तक पानी पहुंचाने के लिए जलकल विभाग को नदी में ड्रेजिंग करनी पड़ रही है।
जीवनी मंडी वाटर वर्क्स को संचालित करने के लिए जलकल विभाग की टीम को पंपों के आसपास नदी का जलस्तर कम से कम 482 रखना पड़ता है। इससे कम पानी रहने पर इंटेकवेल तक पानी नहीं पहुंच पाएगा और वाटर वर्क्स ठप हो जाएगा। उधर यमुना का जलस्तर दिनप्रतिदिन घटता जा रहा है। वहीं, गोकुल बैराज से आगरा के लिए प्रतिदिन कम से कम 1200 क्यूसेक पानी छोड़ा जाना चाहिए लेकिन अब यह घटने लगा है। जलकल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार को डिस्चार्ज 1100 से 1050 क्यूसेक तक पहुंच गया है। इंटेकवेल के पास जलस्तर बनाए रखने के लिए नदी में अब बहुत अंदर ड्रेजिंग करनी पड़ रही है।