जगनेर। क्षेत्र के रिछोहा गांव के समीप बृहस्पतिवार शाम बांध की पाड़ टूटने से आसपास के गांवों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। नगला हसनु, नगला उदयपाल, तुर्कपुरा और सराय अहमद समेत कई गांवों के खेतों में पानी भर जाने से मिर्च, बाजरा सहित खरीफ की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। आक्रोशित किसानों का कहना है कि यदि समय रहते बांध की मरम्मत करा ली गई होती तो उनकी महीनों की मेहनत बर्बाद नहीं होती।
घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम नरेंद्र गंगवार, नायब तहसीलदार अनुज दीक्षित प्रशासनिक टीम के साथ बृहस्पतिवार देर रात तक मौके पर डटे रहे। एसडीएम के निर्देश पर सिंचाई विभाग के अधिकारी भी देर रात मौके पर पहुंचे, लेकिन पर्याप्त संसाधन न होने के कारण बांध से हो रहे तेज पानी के बहाव को तत्काल नियंत्रित नहीं किया जा सका। शुक्रवार सुबह जेसीबी और ट्रैक्टरों की मदद से बांध की टूटी पाड़ की मरम्मत का कार्य शुरू कराया गया और विभागीय अमला पूरे दिन बहाव रोकने व बांध को सुरक्षित करने में जुटा रहा। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र की निगरानी भी जारी रखी।
ग्रामीणों का आरोप है कि बांध की हालत लंबे समय से खस्ता थी, लेकिन संबंधित विभाग ने प्री-मानसून रखरखाव की अनदेखी की। एसडीएम नरेंद्र गंगवार ने बताया कि पूरे मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि किसानों की फसलों के नुकसान का निष्पक्ष आकलन कर उन्हें शीघ्र मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा।
प्री-मानसून तैयारियों की अनदेखी उजागर
यह घटना सिंचाई विभाग की प्री-मानसून तैयारियों की पोल खोलती है। लोगों के अनुसार, हर वर्ष मानसून से पहले बांधों और नहरों की मरम्मत अनिवार्य होती है, लेकिन जमीनी स्तर पर अक्सर इसे नजरअंदाज कर दिया जाता है। रिछोहा बांध का मामला भी इसी लापरवाही का नतीजा है, जिसका सीधा खामियाजा किसानों को अपनी फसल गंवाकर चुकाना पड़ा।