चंबल के बीहड़ों से सफलता की उड़ान: मधुमक्खी पालन से महिला ने खड़ा किया 80 लाख रुपये का कारोबार
पिनाहट। चंबल के बीहड़ किनारे बसे गांव तासौड़ की एक साधारण महिला ने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर सफलता की एक अनूठी मिसाल कायम की है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मदद से मधुमक्खी पालन शुरू करने वाली राजेंद्री देवी आज प्राकृतिक शहद का करीब 80 लाख वार्षिक का कारोबार कर रही हैं। उनके इस उद्यम से स्वयं सहायता समूह की करीब 10 अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी नियमित रोजगार मिल रहा है।
राजेंद्री देवी ने बताया कि वर्ष 2020 में उन्होंने गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर श्री बांके बिहारी स्वयं सहायता समूह का गठन किया। इसके बाद उन्होंने सामुदायिक निवेश निधि 30,000, बैंक कैश क्रेडिट लिमिट 50,000 और मुद्रा योजना लोन 85,000 को मिलाकर कुल 1.85 लाख की पूंजी से मधुमक्खी पालन का काम शुरू किया। राजेंद्री देवी ने बताया कि शुरुआत में मधुमक्खियों के काटने का डर लगता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। व्यवसाय तेजी से बढ़ा। वर्तमान में उनके पास 400 से 500 मधुमक्खी बॉक्स हैं। अप्रैल 2025 में उन्होंने अपनी कंपनी ‘जीएस बिज हनी नेचुरल प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड’ का रजिस्ट्रेशन कराया। कंपनी बनने के बाद उन्हें बैंक से 25 लाख का व्यावसायिक ऋण भी मिला। राजेंद्री ने बताया शहद के कारोबार से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 15 लाख रुपये का मुनाफा हो रहा है।
कई राज्यों में है चंबल के शहद की डिमांड
आज राजेंद्री देवी का तैयार किया हुआ प्राकृतिक शहद अब आगरा, दिल्ली, फिरोजाबाद, कानपुर, इटावा, नोएडा, कन्नौज, मथुरा, हाथरस के साथ राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई शहरों में बिक रहा है। शहद के साथ-साथ वह मधुमक्खियों से निकलने वाले मोम की भी बिक्री करती हैं। वह क्षेत्र की अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए उद्यमिता और स्वावलंबन का रोल मॉडल बन चुकी हैं।