खचाखच भरा ऊंट का मेला, खूब हो रही खरीद-फरोख्त
बाह। बटेश्वर में ऊंट का मेला खचाखच भर गया है। बाड़मेरी, बीकानेरी, जैसलमेरी, सांचोरी नस्ल के ऊंटों की खूब खरीद-फरोख्त हो रही है। 15 हजार से 95 हजार रुपये तक में ऊंट बिके। रेगिस्तान में चाल, पहाड़ी पर चढ़ाई, वजन ढोने की क्षमता के आधार पर पारखी ऊंट खरीद और बेच रहे हैं। शनिवार को मेला का आकर्षण गंगापुर सिटी के नफीस के सांचोरी ऊंट मोती के नाम रहा। मोती की नृत्य मुद्राएं देखने वाले दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर हो गए। नागिन डांस संग झूमे तो बांसुरी बजाने के अंदाज पर तालियां बजाई। नफीस ने बताया कि मोती ने अलवर, पुष्कर के मेले में नृत्य के कई इनाम जीते हैं। उन्होंने मोती के दाम 2 लाख रुपये रखे हैं।
मेले में झांसी की रानी के घोड़े पवन की वंशज गौरी की रफ्तार का रोमांच
वाहनों की औसत चाल से दौड़ती है मारवाड़ी घोड़ी, खूबसूरती पर भी खरीदार लट्टू
कैंप में 2 करोड़ का घोड़ा चांद और 51 लाख की घोड़ी लूना बनी आकर्षण का केंद्र
बाह। बटेश्वर मेले में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के मारवाड़ी घोड़े पवन की वंशज घोड़ी गौरी के रफ्तार के रोमांच का हर कोई कायल है। बटेश्वर मेले में रफ्तार का रोमांच लाने वाली मारवाड़ी घोड़ी रामलाल वृद्धाश्रम आगरा के विनय शर्मा की है। उन्होंने बताया कि गौरी प्रति घंटा 60 किमी की रफ्तार से दौड़ने में माहिर है, उसकी चपलता बेमिसाल है। मेले में उस्ताद पुष्पेंद्र ने गौरी को सरपट दौड़ाया तो उसकी टापों की आवाज सुन लोगों के पैर ठिठक गए। उन्होंने बताया कि गौरी को 3 लाख रुपये में बेचेंगे। अब तक उनके कैंप में 2 लाख रुपये के आस पास के खरीदार पहुंचे हैं। आश्रम के कैंप की शान पंजाब के प्रसिद्ध समुद्री घोड़े की संतान नुकली घोड़ा चांद है। उन्होंने बताया कि नकुली घोड़े के कान मारवाड़ी हैं, शरीर पर धब्बे होने की वजह से घोड़े का नाम चांद रखा है। खुराक में रोजाना 5 किलो चना और 5 किलो दूध दिया जाता है। सप्ताह में एक दिन 2 किलो घी पिलाया जाता है। साढ़े 4 साल के 68 इंच ऊंचे चांद की खूबसूरती, चाल, नाच, चपलता को देख पारखियों की नजर नहीं हटती। उन्होंने बताया कि चांद की कीमत 2 करोड़ रुपये रखी है। पंजाबी व्यापारी ने 85 लाख रुपये कीमत लगाई है। कैंप में 14 माह की पंजाबी घोड़ी लूना भी है। इसके दाम 51 लाख रुपये रखे गए हैं, उन्होंने बताया कि मेले में 18 लाख रुपये के खरीदार मौजूद हैं।
पारखियों का मन मोह रहा घोड़ा-घोड़ी का नाच
बाह। बटेश्वर का ऊंट, घोड़ा, खच्चर का मेला खचाखच भर गया है। गधे भी आने लगे हैं। शुक्रवार से शुरू कराए रजिस्ट्रेशन से मवेशी खरीदने बेचने वाले व्यापारी किसानों ने राहत की सांस ली है। हालांकि मेले में रात में सुरक्षा का सवाल जस का तस बना हुआ है। मेले में पुलिस चौकी तक आबाद नहीं हुई है। फिलहाल मेले में घोड़ा-घोड़ी और ऊंट के नाच पारखियों का मन मोह रहा है। चेन्नई से नकुली घोड़ी रूपा लेकर पहुंचे हसन कादरी से उसकी खूबी और नाच के बारे में जानकर पारखी निगाहें नहीं हटा रहे। जालौन के जीशान उस्ताद ने अपने नकुली घोड़े के नाच और करतब दिखाए। उन्होंने बताया कि 15 महीने के घोड़े के दांत नहीं निकले हैं। दौसा के रामबिहारी ने बताया कि उनके बाड़मेरी ऊंट की चाल और नाच के आधार पर उन्होंने 1.20 लाख रुपये कीमत रखी है। पारखियों ने 85 हजार तक दाम लगाए हैं।