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वर्दी वालों पर आफत: सीबीसीआईडी के सवालों से कतरा रहे 40 पुलिसकर्मी, दर्ज नहीं करा रहे बयान

Fri, 01 Sep 2023 09:41 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा

सार

ये पुलिसकर्मी डेढ़ साल में बयान दर्ज कराने नहीं आए, जिससे कई गंभीर अपराधों की फाइलें सीबीसीआईडी में लटकी हैं। अब विभागीय अधिकारियों को नोटिस का जवाब देने के लिए पत्र लिखा जा रहा है।
 
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आगरा पुलिस की गाड़ी (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में हत्या, धोखाधड़ी और लूटपाट जैसे गंभीर अपराधों की फाइलें सीबीसीआईडी में लटकी हैं। सवालों से बचने के लिए 40 पुलिसकर्मी बयान देने नहीं आ रहे हैं। डेढ़ साल से मामले लटके हैं। अब विभागीय अधिकारियों को नोटिस का जवाब देने के लिए पत्र लिखा जा रहा है।
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सीबीसीआईडी के खंड आगरा में आगरा के साथ मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, हाथरस, कासगंज व अलीगढ़ जिला आता है। इन जिलों से संबंधित केस की विवेचना मानवाधिकार आयोग और शासन से ट्रांसफर होकर यहां आती हैं। इन पर सीबीसीआईडी के विवेचक फिर से अपनी विवेचना करते हैं। इसकी पूरी फाइल तैयार की जाती है। देखा जाता है कि पूर्व में किसने विवेचना की, क्या साक्ष्य लगाए, गवाह कौन था, पुलिसकर्मियों ने भी क्या बयान दिए? इसके बाद उन्हें बयान के लिए बुलाया जाता है।

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पिछले डेढ़ साल से तकरीबन 20 से अधिक केस में विवेचना चल रही हैं। इनमें तकरीबन 40 पुलिसकर्मियों सहित अन्य के बयान दर्ज होना बाकी है। नोटिस दिया जा चुका है। मगर, यह अब तक नहीं आए हैं। आगरा खंड के अपर पुलिस अधीक्षक राजेंद्र यादव का कहना है कि कई मामलों में विवेचक और गवाह नहीं आ रहे हैं। उनको नोटिस भी दिया गया है। अब विभागीय अधिकारियों को लिखा जाएगा।

सवालों की लिस्ट होती है तैयार
सीबीसीआईडी केस से संबंधित गवाह और विवेचक को अपने कार्यालय में बुलाने से पहले सवालों की पूरी लिस्ट तैयार करती है। जिस व्यक्ति या सरकारी कर्मचारी ने बयान दिया होता है, उसको लेकर सवाल-जवाब किए जाते हैं। कई बार पूर्व में की गई लिखापढ़ी से अलग जवाब मिलते हैं। इस वजह से कई बार पुलिसकर्मी जवाब देने नहीं पहुंचते हैं।

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प्रमुख मामले :
- 22 नवंबर 2018 को थाना सिकंदरा पुलिस की हिरासत में राजू गुप्ता नामक युवक की मौत हो गई थी। पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं होने पर परिजन सीबीसीआईडी से जांच करा रहे हैं।
- बरहन में दो साल पहले रेलवे लाइन पर महिला का शव मिला था। मृतका की मां ने शासन में गुहार लगाई। इसके बाद केस सीबीसीआईडी को ट्रांसफर किया गया।
 
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