दोपहर में 1 बजे हरीपर्वत और न्यू आगरा क्षेत्र स्थित स्कूलों की छुट्टी होती है। इनके वाहन एमजी रोड होते हुए लोहामंडी, कलेक्ट्रेट और प्रतापपुरा की तरफ जाते हैं। सोमवार को वाहनों का दबाव अन्य दिन की अपेक्षा अधिक रहता है। स्कूली वाहनों का निकलना शुरू हुआ तो जाम की समस्या होने लगी। राजामंडी से वाहन फंसना शुरू हुए। इसके बाद यह एसएन मेडिकल काॅलेज इमरजेंसी, आगरा काॅलेज, सुभाष पार्क और कलेक्ट्रेट तक फंस गए। इमरजेंसी पर तैनात पुलिस कर्मी वाहनों को निकालने के प्रयास में लगे थे लेकिन कोई फायदा नहीं हो रहा था। वाहनों में फंसे स्कूली बच्चों का हाल बेहाल हो गया।
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दिल्ली की तर्ज पर मार्शल लगाए जाएं
अधिवक्ता केसी जैन ने बताया कि जितनी जगह जरूरी हो, उस पर ही बैरिकेडिंग की जानी चाहिए। कार्य को तेज गति से किया जाना चाहिए। दिल्ली एनसीआर में मेट्रो कार्य के दाैरान ट्रैफिक व्यवस्था संभालने के लिए कंपनी के कर्मचारी लगाए जाते थे। मगर, आगरा में ऐसा नहीं दिख रहा है। जाम में वाहन फंसे रहते हैं। इसलिए मार्शल लगाए जाने चाहिए। वह प्रशिक्षित होने चाहिए। वह पुलिस का सहयोग कर सकते हैं। जिस स्थान पर कट दिया जा सकता है, वहां कट बनाया जाना चाहिए। मिट्टी सड़क पर न आए, उसके लिए एयर क्वालिटी सेंसर लगाए जाने चाहिए, जिससे धूल पर कंट्रोल किया जा सके। पेड़ों को भी लगाया जाना चाहिए। उचित तरीके से बैरिकेडिंग और लाइट की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे बारिश में हादसों का खतरा न हो। यूपी एमआरसी के प्रोजेक्टर डायरेक्टर अरविंद राय का कहना है कि एमजी रोड पर सर्वे किया जा गया है। किनारों पर पेड़ होने की वजह से फुटपाथ को चाैड़ा नहीं कर पा रहे हैं। वाॅलंटियर बढ़ाए जाएंगे। यातायात पुलिस का सहयोग लिया जाएगा।
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