राज्य सरकार ने आगरा में मेट्रो ट्रेन चलाने की परियोजना को मंजूरी दे दी है, लेकिन इसकी डीपीआर (विस्तृत कार्य योजना) में दोनों रेल रूट के निर्माण में एएसआई के संरक्षित स्मारक रोड़ा बनेंगे।
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सिकंदरा से ट्राइडेंट कॉरीडोर और आगरा कैंट से कालिंदी विहार कॉरीडोर में कुल चार स्मारक ऐसे हैं, जिनके 12, 14, 20 और 65 मीटर दूर से मेट्रो गुजरेगी।
एएसआई एक्ट में संशोधन के बाद स्मारकों के 100 मीटर दायरे में निर्माण की अनुमति नहीं है। इसी कानून के कारण सिकंदरा स्मारक पर हाईवे पर फ्लाईओवर का निर्माण नहीं हो सका था।
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आगरा मेट्रो के रूट का मैप
- फोटो : अमर उजाला
आगरा में मेट्रो रेल के लिए दो कारीडोर तय किए गए हैं। इन दोनों में ही दो-दो स्मारक ऐसे हैं, जिनके सौ मीटर दायरे से होकर मेट्रो गुजरेगी।
एलिवेटेड रेल लाइन के लिए नेशनल हाइवे के डिवाइडर वाली जगह पर निर्माण की संस्तुति डीपीआर में की गई है, लेकिन यह जगह गुरु के ताल, पत्थर घोड़ा, रोमन कैथोलिक सीमेट्री और लाल मस्जिद के नजदीक है।
एएसआई स्मारक के 100 मीटर के अंदर होने के कारण मेट्रो के इन निर्माणों को अनुमति नहीं मिल सकती। दरअसल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने साल 2010 में एएसआई एक्ट को बेहद सख्त कर दिया था।
तो बदलना होगा रूट
रूट मैप
- फोटो : अमर उजाला
जिसके तहत स्मारकों के 100 मीटर दायरे में कोई निर्माण नहीं किया जा सकता और न ही पुरातत्व महानिदेशक इसकी विशेष परिस्थितियों में अनुमति दे सकते हैं। दिल्ली में भी स्मारकों के पास से मेट्रो गुजर रही है।
लेकिन दिल्ली में ज्यादातर रूट की अनुमति इस एक्ट के बनने से पहले ही पुरातत्व महानिदेशक और मंत्रालय स्तर पर दी गई थी। नया कानून पास न हो सका तो मेट्रो ट्रेन का रूट बदलना होगा।
ऐसे में प्रोजेक्ट फिर से लेट हो जाएगा। नए रूट में सिकंदरा से गुरू का ताल की जगह बोदला रूट शामिल किया जा सकता है।
राज्यसभा में नया बिल होना है पास
संस्कृति मंत्रालय ने एएसआई एक्ट 2010 में संशोधन का बिल लोकसभा से तो पास करा लिया है, लेकिन अभी इसे राज्य सभा में पास होना बाकी है।
नए बिल के मुताबिक संरक्षित स्मारकों के 100 मीटर दायरे में केवल केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त बुनियादी योजनाओं के लिए विशेष अनुमति दिए जाने का प्रावधान है।
नए बिल के पास होने के बाद सिकंदरा स्मारक के सामने नेशनल हाइवे पर फ्लाई ओवर के निर्माण का रास्ता साफ हो जाएगा। तीन केंद्रीय मंत्रियों के समूह तक यह मामला पहुंचा था, लेकिन एक्ट के कड़े प्रावधानों के कारण यह पुल नहीं बन सका था।
मेट्रो की डीपीआर बनाने वाली राइट्स संस्था के मुताबिक सिकंदरा रेल कारीडोर को अगर पिलर की जगह भूमिगत बनाया जाए तो नया एलाइनमेंट स्मारकों के नीचे और नजदीक से गुजरेगा।
ऐसे में स्मारक की बुनियाद और इमारत को भूमिगत टनल में चलने वाली मेट्रो के कंपन से नुकसान हो सकता है। इसलिए स्मारकों के पास भूमिगत निर्माण की संस्तुति नहीं की गई।
गुरू का ताल और पत्थर घोड़ा पर अगर अनुमति नहीं मिली तो इस रेल रूट को आईएसबीटी तक ही रोकना पड़ेगा, इससे देसी विदेशी पर्यटक सिकंदरा तक नहीं पहुंच सकेंगे।
एसआई के पुरातत्वविद अधीक्षण डा. भुवन विक्रम का कहना है कि 2010 में एएसआई एक्ट में संशोधन के बाद स्मारक के 100 मीटर में कोई भी निर्माण नहीं किया जा सकता।
101 से 300 मीटर परिधि में नेशनल मान्यूमेंट अथारिटी की अनुमति प्राप्त कर निर्माण किया जा सकता है। मेट्रो रूट की फाइनल डीपीआर हमारे पास नहीं है।