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लोकसभा चुनाव 2019: आगरा में उलझा सियासी गणित, सीकरी ने बढ़ाई प्रत्याशियों की धड़कनें

Fri, 19 Apr 2019 11:08 AM IST
मुकेश कुमार राजीव शर्मा, अमर उजाला, आगरा
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मतदान केंद्र के बाहर मतदाताओं की कतार - फोटो : अमर उजाला
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मतदान के बाद आगरा सीट का गणित आंकड़ों में उलझा हुआ दिखाई दे रहा है तो वहीं फतेहपुर सीकरी के मतदाताओं ने प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। हालांकि सभी प्रत्याशी अपनी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। फैसला 23 मई को सामने आएगा। 
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आगरा लोकसभा सीट पर भाजपाई मतदान से पहले ही कह रहे थे कि अगर 2014 से ज्यादा वोट पड़ा तो कमल का फूल खिल जाएगा। मतदान के बाद भाजपा प्रत्याशी एसपी सिंह बघेल के चुनाव कार्यालय पर भारी भीड़ जमा थी। 

सभी के चेहरे खिले थे। जीत के प्रति आश्वस्त थे। नतीजा क्या होगा, यह तो 23 मई को पता चलेगा लेकिन मतदाताओं के रुझान से भाजपाई फूले नहीं समा रहे हैं। कह रहे हैं कि हमारा बूथ प्रबंधन नंबर वन रहा।
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आगरा लोकसभा सीट पर मुकाबला पहले से भाजपा के एसपी सिंह बघेल और गठबंधन के मनोज सोनी के बीच माना जा रहा था। पोलिंग बूथ पर लगे बस्तों से भी यही रुझान आया कि टक्कर इन दोनों के बीच रही। 
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कई जगह नहीं लगे बस्ते

मुस्लिम महिला मतदाता - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस की प्रीता हरित के तो कई जगह बस्ते तक नहीं लगे। मंटोला, नई बस्ती, तेलीपाड़ा, सैयदपाड़ा, ताजगंज के बूथों पर मुस्लिमों की लाइनें तो थीं लेकिन पहले जैसी लंबी नहीं थीं। वोट बंट नहीं रहा था। 

मंटोला में इकरार कुरैशी का कहना था कि अब कोई वोट बेकार नहीं करता, हाथी टक्कर में हैं, मुस्लिम हाथी के साथी बन गए हैं। कमला नगर, बल्केश्वर, ट्रांस यमुना, खंदारी में कई वोटर वोट डालने के बाद मोदी-मोदी कहते निकले। 

विधानसभा की बात करें तो सबसे कड़ा मुकाबला जलेसर में रहा। एत्मादपुर, उत्तर, दक्षिण, छावनी में भाजपाई खुद को फायदे में बता रहे हैं। जलेसर की यादव बेल्ट ने गठबंधन धर्म निभाया। हालांकि ,जाट वोटर रालोद के रंग में रंगे नजर नहीं आए। सीकरी में जाट को टिकट देने का फायदा भाजपा को आगरा में भी मिला।

दलित वोट बंटे, मुस्लिम एकतरफा

जगदीशपुरा में दलित वोटर हाथी के साथी बने लग रहे थे जबकि युवा कह रहे थे कि बघेल को कोई रोक नहीं सकता है। चक्कीपाट में हाथी तेज चला लेकिन फूल भी खिला। कुल मिलाकर दलित वोटों में विभाजन दिखा। मुस्लिम मोहल्लों में बुधवार रात ही तय हो गया था कि भाजपा के खिलाफ और गठबंधन के साथ चलना है। ऐसा ही किया।
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सीकरी के गणित में उलझे राजनीति के पंडित

मतदान केंद्र के बाहर खड़े मतदाता - फोटो : अमर उजाला
फतेहपुर सीकरी सीट पर कांग्रेस के राज बब्बर और भाजपा के राजकुमार चाहर के बीच कांटे का जो मुकाबला माना जा रहा था, वो मतदान के रुझान में भी नजर आया। दोनों के बस्तों पर भीड़ थी। दोनों के कार्यकर्ता वोटरों को लाने में लगे थे। कई जगह तो गठबंधन प्रत्याशी श्रीभगवान शर्मा के बस्ते तक नहीं थे।
 
गणित ऐसा फंसा है कि राजनीति के पंडित तक उलझ गए हैं। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में राजबब्बर की पुरानी पकड़ का असर दिखा। सीकरी में भाजपा और कांग्रेस दोनों के बस्तों पर भीड़ थी। खेरागढ़ और फतेहाबाद से भाजपा सबसे ज्यादा आस लगाए है। बाह में वोटों का बंटवारा बताया जा रहा है। 

पिनाहट कस्बे में हाथ हावी रहा, तो देहात में फूल खिला। गठबंधन का मुख्य गणित दलित और ब्राह्मण वोटों का पर टिका था। इनमें दलित वोटों में राजबब्बर की बड़ी सेंध रही। ब्राह्मण वोटरों में बड़ी सेंधमारी चाहर ने की। चाहर को चाहर होने लाभ चाहरवाटी में मिला। खेरागढ़ में वैश्य वोटर बंटे नहीं। कुशवाहा का बंटवारा भाजपा और कांग्रेस में हुआ।

गठबंधन को टिकट बदलने का नुकसान

पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय के मैदान छोड़ने से गठबंधन को नुकसान और भाजपा को फायदा बताया जा रहा है। सीकरी में हर्ष सारस्वत ने कहा, अगर गुड्डू की जगह कोई और उम्मीदवार होता, तो हम हाथी के साथी बनते।


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