मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज आगरा आ रहे हैं। इस मौके पर वकीलों ने एक बार फिर मांग उठाई है कि ताजनगरी में उच्च न्यायालय की खंडपीठ स्थापित की जाए। उनका कहना है कि खंडपीठ आगरा का हक है, यह मिलनी ही चाहिए। मुख्यमंत्री को चाहिए कि वह जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट को लागू करवाएं।
आयोग ने आगरा में खंडपीठ स्थापित किए जाने की बात कही थी। खंडपीठ के लिए आंदोलन चला रहे अधिवक्ता सोमवार को रणनीति बनाते रहे। उनकी तैयारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने अपनी बात रखने की है।
उधर, प्रशासन ने ऐसे इंतजाम किए हैं कि बगैर अनुमति और पास के कोई विवि परिसर में प्रवेश नहीं कर पाएगा। खुफिया पुलिस के अधिकारी सोमवार को दिनभर यही मालूम करने में लगे रहे कि सीएम के सामने कौन-कौन संगठन विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं।
अधिवक्ता केडी शर्मा, अचल शर्मा, डा. हरिदत्त्त शर्मा, करतार सिंह भारतीय, शरद लवानियां, रमाशंकर राजपूत, पीके सिंह, गजेंद्र शर्मा, दरवेश यादव, चौधरी अजय सिंह, ओपी सिंह, नरेंद्र शर्मा का कहना है कि खंडपीठ आगरा की जरूरत भी है और हक भी। मुख्यमंत्री को चाहिए कि वह ताजनगरी को उसका हक दिलाएं।
यह है जसवंत सिंह आयोग की रिपोर्ट
1980 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने वेस्ट यूपी में खंडपीठ की जरूरत महसूस की। उनकी संस्तुति पर जसवंत सिंह आयोग का गठन किया गया। आयोग ने पश्चिमी यूपी के 25-30 जिलों में जाकर तमाम पहलुओं पर गौर किया। तमाम बुद्धिजीवियों से बात की। इसके बाद आगरा को सर्वाधिक उपयुक्त मानते हुए यहां बेंच की स्थापना की संस्तुति की थी।
लाठीचार्ज तक किया जा चुका है वकीलों पर
खंडपीठ के लिए आगरा के वकील पुलिस का लाठीचार्ज तक झेल चुके हैं। घटना 17 साल पहले 26 सितंबर, 2001 को हुई थी। पुलिस और पीएसी ने दीवानी परिसर में अधिवक्ताओं पर लाठीचार्ज किया था। इसकी जांच के लिए कमेटी बनी। कमेटी ने दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ रिपोर्ट दी लेकिन उन पर आज तक कार्रवाई नहीं हुई है।
मेट्रो ट्रेन की योजना भी आगे नहीं बढ़ी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने आगरा की और भी योजनाएं रखी जा सकती हैं। मेट्रो ट्रेन चलाने की डीपीआर बनी है लेकिन इससे आगे बात नहीं बढ़ पा रही है।
स्मार्ट सिटी पर कोई काम ही नहीं
स्मार्ट सिटी के लिए पैसा है, अधिकारी हैं, कर्मचारी हैं लेकिन काम नहीं हो रहा। सरकार गंभीर नहीं हुई तो बजट ठिकाने लग जाएगा। शहर में अभी तक कोई काम नजर नहीं आया है।
गंगाजल की रफ्तार सुस्त
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद दो बार गंगाजल प्रोजेक्ट की समीक्षा कर चुके हैं। इसकी रफ्तार धीमी है। पहले कहा जा रहा था कि अक्तूबर तक मिल जाएगा, लेकिन अब देरी तय हो चुकी है।