आगरा में यमुना नदी के किनारे पहले बाग रामबाग के साथ ही मुगल वंश के संस्थापक बाबर ने एक और बाग ए जार अफशान बनवाया था। यह अब चौबुर्जी के नाम से चर्चित है। इसी बाग में मुगल बादशाह बाबर को 1530 में मृत्यु के बाद अस्थायी तौर पर दफन किया गया था। छह माह के दफन के बाद शव को निकालकर काबुल ले जाकर दफनाया गया।
यह मुगलिया दौर के पहले उद्यानों में से एक है। चार बुर्जियों के होने के कारण इसका नाम चौबुर्जी हो गया। बाबर ने 1526 में आराम बाग और 1528 में बाग ए जार अफशान को बनवाया था। बाबर के इस चारबाग में अब बागीचा तो बचा नहीं, लेकिन यह इमारत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने संरक्षित कर रखी है।
इतिहासकार राज किशोर शर्मा राजे ने बताया कि चौबुर्जी नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें चार बुर्जी है। बाबर की मृत्यु के बाद अस्थायी तौर पर यहीं पर शव दफन किया गया। चौबुर्जी में पीछे की ओर कभी हमाम था, जिसके अब अवशेष है। पानी के चार टैंक हैं, जिनमें पहले सुगंधित पानी भरा रहता था। मुगल बादशाह बाबर के समय में इस बाग में बड़े पेड़ थे और हरा भरा क्षेत्र था, लेकिन अब अतिक्रमण से घिरा हुआ है।
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