मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में ताजमहल को तामीर कराया। ताज के पूर्वी दिशा में ही मुमताज महल की सेवा में तैनात ख्वाजासरा की हवेली है, जिसे हवेली आगा खां के नाम से जानते हैं।
दशहरा घाट से पूर्वी दिशा पर यमुना किनारा पर बनी हवेली आगा खां ताजमहल के मुतवल्ली और आगरा के फौजदार रहे आगा खां की थी। आगा खां की मौत सन 1657 में हो गई थी। हवेली खान ए दौर्रान से आगे यह हवेली थी, जिसका अब तीन मंजिला बुर्ज ही अवशेष के रूप में बाकी है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने हवेली आगा खां को तीन साल पहले ही संरक्षित स्मारक घोषित किया है। आस्ट्रियन इतिहासकार ईवा कोच ने अपनी किताब ‘द कंप्लीट ताजमहल एंड द रिवरफ्रंट गार्डन्स आफ आगरा’ में हवेली आगा खां के बारे में बताया है कि आगा खां मुमताज की सेवा में तैनात ख्वाजासरा थे। वह साल 1652 तक आगरा के फौजदार और ताजमहल के मुतवल्ली रहे। वर्ष 1652 में आगरा के निकट सामूगढ़ में शाहजहां के लिए शिकारगाह का निर्माण उनकी देखरेख में किया गया था। वर्ष 1657 में जब उनकी मृत्यु हुई तब उनके पास 1500 सवार की मनसबदारी थी।
ताज के फोटो में नजर आते हैं अवशेष
आगा खां की हवेली का जिक्र ताजमहल के म्यूजियम में प्रदर्शित ब्रिटिशकालीन ड्राइंग्स में भी मिलता है। वर्ष 1850 में जान मूरे द्वारा हवेली खान-ए-दौर्रान से लिए गए ताजमहल के फोटो में हवेली आगा खां के अवशेष नजर आते हैं।
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