सावन के बाद भादों में देश के आधे हिस्से के लोग बाढ़ का कहर झेल रहे हैं, लेकिन सूबे में सूखे जैसे हालात हैं। सूबे के 58 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। प्रदेश में जिन जिलों में बारिश सबसे कम हुई, उनमें नोएडा पहले नंबर पर, आगरा दूसरे, गाजियाबाद तीसरे, हाथरस चौथे और मुजफ्फर नगर पांचवें नंबर पर है।
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यूपी से रूठे मानसून के कारण केवल 14 जिलों में ही बारिश सामान्य तक पहुंच सकी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा सूखे के हालात हैं। यहां तीस जिलों में से केवल दो जिलों में ही सामान्य बारिश हुई है।
सावन का महीना सूखा बीता तो लोगों की उम्मीदें जन्माष्टमी पर लगीं, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में जन्माष्टमी पर सूखा ही रहा। मथुरा में सामान्य से 48 फीसदी बारिश कम हुई है। यहां मानसून की दस्तक के बाद 369 मिमी के मुकाबले केवल 190 मिमी बारिश दर्ज की गई।
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आगरा के पड़ोसी जिलों में केवल फिरोजाबाद ही ऐसा जिला है, जहां 419 मिमी की अपेक्षा 409 मिमी बारिश हो चुकी है। बाकी सभी जिले एटा, मथुरा, मैनपुरी, कासगंज, हाथरस, अलीगढ़ में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है। ब्रज के साथ बुंदेलखंड का इलाका पूरी तरह से सूखा है। यहां के सभी जिलों में 25 से 50 फीसदी तक बारिश कम दर्ज की गई है।
इन जिलों पर सूखे का कहर ज्यादा
सूखा
- फोटो : अमर उजाला
सबसे सूखे 6 जिलों के साथ औरैया, बदायूं,, अलीगढ़, बिजनौर, बुलंदशहर, एटा, इटावा, हमीरपुर, जालौन, झांसी, ज्योतिबा फुले नगर, हाथरस, कासंगज, ललितपुर, महोबा, मथुरा, मेरठ, पीलीभीत, रामपुर, शाहजहांपुर, सहारनपुर, अमेठी, बलिया, बलरामपुरा, बांदा, चंदौली, देवरिया, फैजाबाद, फतेहपुर, गोंडा, जौनपुर, कानपुर देहात, कुशीनगर, मऊ, रायबरेली, संत रविदास नगर, उन्नाव, सुल्तानपुर में बारिश सामान्य से आधी तक रही है।