आगरा में आरटीई के तहत चयनित 2012 गरीब बच्चों को 50 निजी स्कूलों ने अब तक दाखिला नहीं दिया है। डीएम मनीष बंसल ने स्कूलों की मनमानी पर नाराजगी जताते हुए एक सप्ताह में शत-प्रतिशत प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने का सपना कागजी दांव-पेच में फंस गया है। रसूखदार स्कूल पात्रता जांचने के नाम पर न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि मासूमों को गेट से ही लौटा रहे हैं। आरटीई के तहत चयन के बावजूद 50 स्कूलों ने 2012 बच्चों को दाखिला नहीं दिया।
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बुधवार को कलेक्ट्रेट में हुई समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी मनीष बंसल स्कूलों की मनमानी पर भड़क उठे। दाखिला नहीं देने वाले 50 बड़े स्कूलों की कुंडली सामने आई है। बैठक में पेश की गई इस सूची ने निजी स्कूलों की संवेदनहीनता की पोल खोल दी। कई नामी स्कूलों ने एक भी बच्चे को प्रवेश नहीं दिया।
डीएम ने कहा कि क्या ये सभी बच्चे अपात्र हैं या आपके इरादे ही नेक नहीं हैं। स्कूलों ने अधूरे कागजात और अपात्र होने के बहाने बनाए। डीएम ने कहा कि जांच करना आपका काम नहीं, आप सिर्फ प्रवेश लें। डीएम ने फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया कि पात्रता की जांच करना स्कूल का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि लॉटरी में आवंटित बच्चे को प्रवेश देना अनिवार्य है। संदेह होने पर अभिभावक से अंडरटेकिंग लें और प्रशासन को सूचित करें। यदि गेट से किसी बच्चे को भगाने की शिकायत मिली तो स्कूल प्रबंधन सीधे कार्रवाई के लिए तैयार रहे।
जिले में कुल 8,112 आवंटन के सापेक्ष अब तक मात्र 6100 दाखिले ही हो सके हैं, यानी करीब 25 प्रतिशत गरीब बच्चे अब भी स्कूलों की दहलीज पार करने को तरस रहे हैं। डीएम ने बीएसए को निर्देशित किया कि जो स्कूल सहयोग न करें, उनके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जाए।
बैठक में पता चला कि बिना अपनी बस वाले स्कूल निजी वाहनों के चालकों का सत्यापन और फिटनेस कराने से बच रहे हैं। डीएम ने एआरटीओ को ऐसे स्कूलों पर नकेल कसने के निर्देश दिए हैं। एक सप्ताह का समय देते हुए स्कूल प्रबंधनों से कहा कि बहानेबाजी बंद करें और शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करें, वरना सख्त कार्रवाई होगी। बैठक में सीडीओ प्रतिभा सिंह, बीएसए जितेंद्र कुमार गोंड और एआरटीओ आलोक अग्रवाल मौजूद रहे।