जांच रिपोर्ट के 15 दिन बाद भी कार्रवाई शून्य
19 जून को प्रशासन ने थाना न्यू आगरा प्रभारी को संचालक के विरुद्ध मुकदमे में विवेचना के आदेश दिए हैं। जिसमें डॉ. अरिन्जय के ऑक्सीजन कमी का भ्रम फैलाने, महामारी एक्ट की धाराओं में जांच करनी है। 15 दिन बाद भी मुकदमे में पुलिस व प्रशासन की कार्रवाई शून्य है। ऐसे संवेदनशील मामले में अफसरों की कार्यशैली सवालों के घेरे में है।
जांच में ये तथ्य किए नजरअंदाज
- ऑक्सीजन वेंडर ने फोन कर ऑक्सीजन नहीं मिलने की बात संचालक को बताई। जांच में वेंडर से कोई पूछताछ नहीं की गई।
- उस समय ऑक्सीजन सिलिंडर वितरण की व्यवस्था प्रशासन के अधीन थी, उन अधिकारियों के जांच में बयान तक नहीं लिए।
- 25 अप्रैल की रात ऑक्सीजन संकट की सच्चाई जांचने के लिए अन्य कोविड अस्पताल संचालकों से हकीकत नहीं पूछी गई।
- जांच में प्रशासन ने कहा - ऑक्सीजन बंद करने से कोई मौत नहीं हुई, फिर 48 घंटे में 16 मरीजों की अचानक मौत कैसे हो गई।
- डॉ. अरिंजय की वीडियो में कही ‘दिमाग मत लगाओ, अब वो छांटो जिनकी ऑक्सीजन बंद हो सकती है। एक ट्रायल मार दो... पता चल जाएगा कौन मरेगा कौन नहीं। सुबह सात बजे मॉकिड्रल की और 22 छंट गए... नीले पड़ने लगे हाथ पैर... छटपटाने लगे... आदि बातों को जांच में शामिल क्यों नहीं किया।
- मॉकड्रिल का समय और छह मरीजों की मौत का समय लगभग सामान है, ऐसे में क्या बाकी लोगों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ा।
- आईएमए और प्रशासन के व्हाट्सएप ग्रुप में संचालक ने अपनी मजबूरी बताई थी, उस पत्र को जांच में शामिल क्यों नहीं किया गया।
- अगर उस रात मरीजों के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन होती तो क्या कोई सोने के भाव ऑक्सीजन खरीदने को तैयार हो सकता है।