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आगरा के श्री पारस अस्पताल का मामला: प्रशासन ने जांच में कई तथ्य किए नजरअंदाज

Mon, 05 Jul 2021 01:39 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

प्रशासन ने श्री पारस अस्पताल के संचालक डॉ. अरिंजय जैन पर ऑक्सीजन कमी की अफवाह फैलाने का ही आरोप साबित किया है। बाकी तथ्यों को नजरअंदाज कर दिया। 
 
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श्री पारस अस्पताल प्रकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के श्री पारस अस्पताल में मॉकड्रिल के वीडियो में डॉ. अरिंजय जैन की कही आधी बातों को ही प्रशासन ने जांच में शामिल किया है। संचालक को ऑक्सीजन की कमी की अफवाह फैलाने का दोषी माना है। वीडियो में कही अन्य बातों को नजरअंदाज कर दिया। वीडियो में संचालक कह रहा है कि ‘दिमाग मत लगाओ, अब वो छांटो जिनकी ऑक्सीजन बंद हो सकती है। एक ट्रायल मार दो... पता चल जाएगा कौन मरेगा कौन नहीं। सुबह सात बजे मॉकड्रिल की और 22 छंट गए... नीले पड़ने लगे हाथ पैर... छटपटाने लगे...’ इस सब बातों को जांच में शामिल नहीं किया गया है।

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श्री पारस अस्पताल में 26 अप्रैल को ऑक्सीजन की मॉकड्रिल को बयान करते 28 अप्रैल के वीडियो सात जून को वायरल हुए थे। आठ जून को मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया और जिलाधिकारी को कार्रवाई के आदेश दिए। उसी दिन डीएम ने ऑक्सीजन की कमी की अफवाह फैलाने के मामले में संचालक के विरुद्ध एफआईआर कराई। दूसरे दिन हॉस्पिटल लाइसेंस निरस्त कर उसे सील कर दिया। 

वीडियो की 10 दिन की जांच के बाद 18 जून को रिपोर्ट आई तो उसमें भी वहीं आरोप सिद्ध हुए जो बातें 10 दिन पहले जिलाधिकारी ने श्री पारस अस्पताल के बारे में कही थीं। यानी दस दिन वीडियो की जांच के बाद भी वीडियो में कही संवेदनशील बातों को जांच में शामिल नहीं किया। न पीड़ितों की शिकायतों को कोई अहमियत मिली। ऐसे में एक तरफा जांच रिपोर्ट को डिप्टी सीएम ने सतही बताकर प्रश्न चिह्न खड़ा कर दिया है, दूसरी तरफ संवेदनशील मामले की जांच में अफसरों की कार्यशैली से पीड़ितों में रोष है। 

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जांच रिपोर्ट के 15 दिन बाद भी कार्रवाई शून्य
19 जून को प्रशासन ने थाना न्यू आगरा प्रभारी को संचालक के विरुद्ध मुकदमे में विवेचना के आदेश दिए हैं। जिसमें डॉ. अरिन्जय के ऑक्सीजन कमी का भ्रम फैलाने, महामारी एक्ट की धाराओं में जांच करनी है। 15 दिन बाद भी मुकदमे में पुलिस व प्रशासन की कार्रवाई शून्य है। ऐसे संवेदनशील मामले में अफसरों की कार्यशैली सवालों के घेरे में है।
 
जांच में ये तथ्य किए नजरअंदाज
- ऑक्सीजन वेंडर ने फोन कर ऑक्सीजन नहीं मिलने की बात संचालक को बताई। जांच में वेंडर से कोई पूछताछ नहीं की गई।
- उस समय ऑक्सीजन सिलिंडर वितरण की व्यवस्था प्रशासन के अधीन थी, उन अधिकारियों के जांच में बयान तक नहीं लिए।
- 25 अप्रैल की रात ऑक्सीजन संकट की सच्चाई जांचने के लिए अन्य कोविड अस्पताल संचालकों से हकीकत नहीं पूछी गई।
- जांच में प्रशासन ने कहा - ऑक्सीजन बंद करने से कोई मौत नहीं हुई, फिर 48 घंटे में 16 मरीजों की अचानक मौत कैसे हो गई।
- डॉ. अरिंजय की वीडियो में कही ‘दिमाग मत लगाओ, अब वो छांटो जिनकी ऑक्सीजन बंद हो सकती है। एक ट्रायल मार दो... पता चल जाएगा कौन मरेगा कौन नहीं। सुबह सात बजे मॉकिड्रल की और 22 छंट गए... नीले पड़ने लगे हाथ पैर... छटपटाने लगे... आदि बातों को जांच में शामिल क्यों नहीं किया।
- मॉकड्रिल का समय और छह मरीजों की मौत का समय लगभग सामान है, ऐसे में क्या बाकी लोगों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ा।
- आईएमए और प्रशासन के व्हाट्सएप ग्रुप में संचालक ने अपनी मजबूरी बताई थी, उस पत्र को जांच में शामिल क्यों नहीं किया गया।
- अगर उस रात मरीजों के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन होती तो क्या कोई सोने के भाव ऑक्सीजन खरीदने को तैयार हो सकता है।
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अपने दोष छिपाने के लिए दी क्लीनचिट
दहतोरा की प्रियंका सिंह ने कहा कि जब संक्रमण चरम पर था तब ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा हुआ था। प्रशासन ऑक्सीजन का प्रबंध नहीं कर सका। श्रीपारस में मेरी मां मर गई। ऐसे ही हजारों लोगों मरे होंगे। अपने दोष छिपाने के लिए हॉस्पिटल को क्लीनचिट दी गई है। 

अरबपति है, कारोड़ों खर्च किए होंगे
मधु नगर के नत्थीलाल त्यागी ने कहा कि अस्पताल संचालक अरबपति है। मरीजों से बहुत उल्टा-सीधा पैसा कमाया है। अपनी जान बचाने के लिए करोड़ों खर्च किए होंगे। नेता और अफसर भ्रष्ट हैं। उनसे मैं कोई उम्मीद नहीं रखता। मेरी पत्नी मर गई। मैं बीमार क्या कर सकता हूं। 

मानवाधिकार आयोग करेगा जवाब-तलब
श्री पारस अस्पताल प्रकरण में राष्ट्रीय व राज्य दोनों मानवाधिकार आयोग जवाब-तलब करेंगे। सामाजिक कायर्कर्ता नरेश पारस की शिकायत को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में पंजीकृत है। वहीं जीवनी मंडी पीड़ित अशोक चावला की शिकायत भी राज्य मानवाधिकार आयोग ने दर्ज कर ली है। पीड़ित के पिता व भाई की बहू की मृत्यु श्री पारस अस्पताल में हुई थी। आगामी दिनों में दोनों आयोग जांच के लिए समन जारी कर सकते हैं।
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