आगरा में रवि हॉस्पिटल के डिबार होने से निजी कोविड अस्पतालों में हड़कंप है। कार्रवाई के डर से मंगलवार को संचालकों ने शुल्क सूचियां चस्पा कर दीं। आईसीयू, वेंटिलेटर से लेकर ऑक्सीजन युक्त खाली बेड का ब्योरा सार्वजनिक किया गया है। इसमें 25 कोविड अस्पतालों के 2224 बेड में से 987 खाली बताए हैं।
मरीज से मनमाना इलाज खर्च वसूलने और शुल्क सूची एवं खाली बेड का ब्योरा सार्वजनिक नहीं करने पर जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने सोमवार को आईएमए के पूर्व अध्यक्ष रवि पचौरी के रवि हॉस्पिटल में मरीज भर्ती पर रोक लगाई थी। अस्पताल को कोविड सूची से डिबार किया था। मंगलवार को इसका असर अन्य कोविड अस्पतालों पर दिखा। राम रघु, नयति, रेनबो, प्रभा, श्रीकृष्णा, पुरुषोत्तमदास सावित्री, पाठक, एसआर समेत 25 अस्पतालों ने मंगलवार सुबह 9 बजे ही नोटिस बोर्ड पर शुल्क सूची और खाली बेड का ब्योरा चस्पा कर दिया।
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने कहा कि कोई भी अस्पताल तय इलाज खर्च से अधिक बिलिंग नहीं करेगा। जिनकी शिकायत मिलेगी उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी। अस्पतालों में आधे बेड खाली हैं। कोई भी मरीज सीधे अस्पताल जाकर या कंट्रोल रूम 0562-2551601 पर कॉल कर भर्ती हो सकता है।
अस्पतालों में बेड का ब्योरा
25 अस्पतालों में 2224 बेड, 1237 भरे - 987 खाली
आईसीयू बेड
कुल 535 - 468 भरे हुए - 67 खाली
वेंटिलेटर बेड
कुल 248 - 215 भरे हुए - 33 खाली
बाईपेप बेड
कुल 135 - 109 भरे हुए - 26 खाली
एचएफएनसी बेड
कुल 60 - 23 भरे हुए - 37 खाली
ऑक्सीजन बेड
कुल 2102 - 1264 भरे हुए - 838 खाली
(नोट-अस्पतालों द्वारा उपलब्ध सूचना के आधार पर)
एंबुलेंस संचालकों ने चस्पा की किराया सूची
निजी एंबुलेंस संचालकों ने मंगलवार को वाहनों पर किराया सूची चस्पा की हैं। उत्तर प्रदेश एंबुलेंस एसोसिएशन अध्यक्ष रवि सिसोदिया ने बताया कि सूची लगाने से मरीजों को सुविधा होगी। सूची के आधार पर ही किराया लिया जाएगा। अगर कोई एंबुलेंस चालक अधिक किराया लेता है तो उसकी शिकायत दर्ज कराएं।
ये हैं एंबुलेंस का किराया
- बिना ऑक्सीजन- 800 रुपये (10 कि मी तक)- अधिक चलने पर 30 रुपये प्रति किमी।
- ऑक्सीजन सहित- 1200 रुपये (10 किमी तक)- अधिक चलने पर 50 रुपये प्रति किमी।
- वेंटीलेटर सहित- 2200 रुपये(10 किमी तक)- अधिक चलन पर 100 रुपये प्रति किमी।
डीएम को भेजा स्पष्टीकरण, बकाया भुगतान की मांग
रवि हॉस्पिटल के संचालक रवि मोहन पचौरी ने मंगलवार को नोटिस का स्पष्टीकरण जिलाधिकारी को भेज दिया है। उन्होंने जवाब में लिखा है कि मरीज स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत इलाज करा रहा था। उसने पूरा पैसा नहीं दिया है। बकाया भुगतान का चेक दिया था, जो बाउंस हो गया। उसे नोटिस भेजने पर शिकायत की गई। उन्होंने बकाया भुगतान कराने की मांग की है।