आगरा की अदालत ने बीमारी दूर करने और रुपये देने का लालच देकर धर्मांतरण कराने के आरोप में जयपुर निवासी विनीत बेदी की जमानत अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने आरोपों की गंभीरता, केस डायरी में दर्ज बयानों और जारी विवेचना को अहम आधार माना।
एडीजे-1 पुष्कर उपाध्याय ने बीमारी दूर करने और रुपये मिलने का लालच देकर लोगों का धर्मांतरण कराने के मामले में जयपुर के राज विहार कॉलोनी निवासी विनीत बेदी की जमानत अर्जी खारिज करने के आदेश दिए। अदालत ने केस डायरी में दर्ज बयानों और बरामदगी का हवाला देते हुए कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।
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अदालत ने कहा कि विवेचना जारी है और अभी साक्ष्य संकलित किया जाना शेष है। अभियुक्त के दूसरे प्रदेश का निवासी होने के कारण उसके फरार होने की आशंका से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। थाना सैंया थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार रौनक ठाकुर ने 23 सितंबर को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि गांव जोधापुरा में प्रताप कुशवाह के घर पर जन्मदिन के बहाने महिलाओं और पुरुषों को बुलाकर ईसाई धर्म का प्रचार किया जा रहा था। आरोपी लोगों को रुपये देने और बीमारी दूर करने का लालच देकर उनका धर्म परिवर्तन करा देते हैं।
विनीत बेदी, बंटू और मुखराज ने एक वर्ष पहले प्रताप की मां चंद्रवती का भी धर्म परिवर्तन कराया था। इस मामले में अदालत ने केस डायरी में दर्ज चंद्रवती के बयान का उल्लेख किया। चंद्रवती ने एक वर्ष पहले ईसाई धर्म अपना लिया था। 23 सितंबर को उसके नाती के जन्मदिन पर गांव के लोग और रिश्तेदार घर आए थे। इस दौरान विनीत बेदी और बंटू लोगों को ईसाई धर्म की अच्छाइयों और उससे मिलने वाले लाभ के बारे में बता रहे थे। इन्हीं लोगों ने उसे ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया था और धर्म परिवर्तन करने पर रुपये मिलने तथा बीमारी दूर होने की बात समझाई थी।