पुलिस ने लगा दी थी फाइनल रिपोर्ट
पुलिस ने विभागीय मामला होने के कारण मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाकर अदालत में प्रस्तुत कर दी। इसे 26 मार्च 1984 को अदालत ने स्वीकार कर लिया। वादी ने वर्ष 1987 में आरोपियों के खिलाफ परिवाद प्रस्तुत किया। इस पर 25 जून 1987 को अदालत ने आरोपियों को मुकदमे के विचारण के लिए तलब करने के आदेश किए। विचारण के दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष ओम प्रकाश त्यागी, उपनिरीक्षक राम नरायन सिंह, सिपाही नबाव सिंह, सिपाही किशन कुमार की मृत्यु हो गई।
वहीं वादी मुकदमा लज्जाराम, वृंदावन, यशपाल उर्फ विलायती और गवाह कैलाशी की भी मृत्यु हो गई। मामले में चरन सिंह, राम सिंह और ओमप्रकाश की ही गवाही हुई। तीनों गवाहों के गवाही से मुकरने पर अपर जिला जज प्रथम सुधीर कुमार ने साक्ष्य के अभाव में तत्कालीन उप निरीक्षक त्रिपुरारी दिवाकर, सिपाही सतीश कुमार और सिपाही जगदीश प्रसाद को बरी करने के आदेश किए।