एक सदी पुराना आगरा कॉलेज जंग का मैदान बना हुआ है। प्राचार्य पद की लड़ाई में कॉलेज का विकास उपेक्षित हो रहा है। कॉलेज में जगह-जगह पर छत से प्लास्टर झड़ रहा है तो शौचालय गंदगी से अटे पड़े हैं। पीने के पानी के लिए भी छात्र-छात्राओं को एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग तक का सफर तय करना पड़ता है। शिक्षकों के दो गुट में बंट चुके कॉलेज में पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
आंबेडकर विवि के सबसे पुराने महाविद्यालय आगरा कॉलेज का हाल बेहाल है। प्राचार्य पद पर प्रो. अनुराग शुक्ला के ऊपर गंभीर आरोप लगे हैं। सीजेएम कोर्ट से मुकदमा दर्ज करने के आदेश के बाद से ही प्राचार्य छुट्टी पर चल रहे हैं। डॉ. आरके श्रीवास्तव कार्यवाहक प्राचार्य के रूप में काम देख रहे हैं। शिक्षकों के एक गुट को इस पर भी आपत्ति है। कहा जा रहा है कि डॉ. शुक्ला वरिष्ठता क्रम की अवहेलना करके डॉ. श्रीवास्तव को कार्यभार सौंप गए हैं।
प्राचार्य पक्ष के लोग जहां राह की उम्मीद लगाए बैठे हैं तो विपक्ष के शिक्षक गिरफ्तारी के कयास लगा रहे हैं। इन सबके बीच में सबसे ज्यादा नुकसान कॉलेज को हो रहा है। बीए की छात्रा प्रिया कहती हैं कि कॉलेज में नियमित कक्षाएं नहीं लग रहीं। एक या दो प्रोफेसर ही आते हैं। कला वर्ग की छात्रा अनुप्रिया बताती हैं कि कॉलेज में प्रसाधन कक्ष (शौचालय) गंदगी से अटे पड़े हैं।
छात्र अभिषेक बताते हैं कि इतने पुराने कॉलेज में कहीं भी फर्स्ट फ्लोर पर पेयजल की व्यवस्था नहीं है। वाटर कूलर में पानी आता है तो मिल जाता है वरना हमें नीचे मुख्य भवन में जाकर पानी मिल पाता है। बीते दिनों हुई बरसात में प्राचार्य कक्ष के साथ-साथ केमिस्ट्री विभाग की छत का प्लास्टर भरभराकर गिरा था। छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षकों को जर्जर भवन में कक्षाएं लेनी पड़ रही हैं। इस संबंध में कुलसचिव पीके सिंह का कहना है कि कॉलेज में व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी प्राचार्य की होती है। कॉलेज की व्यवस्थाओं के लिए विश्वविद्यालय जिम्मेदार नहीं होता।