आगरा के सिविल एयरपोर्ट को वायुसेना परिसर से बाहर शिफ्ट करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। जिला प्रशासन ने धनौली, बल्हेरा और अभयपुरा गांवों की अतिरिक्त जमीन भी इसके लिए चिह्नित कर ली है। नवंबर के अंत तक 92.50 एकड़ और जमीन एयरपोर्ट अथॉरिटी को दे दी जाएगी। बस औपचारिकता होनी बाकी है।
एयरपोर्ट के निदेशक नीरज कुमार श्रीवास्तव ने यह जानकारी सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधिमंडल को दी। उन्होंने बताया कि जल्द ही इस प्रोजेक्ट को अथॉरिटी को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। एन्क्लेव के तैयार होने में कम से दो साल का समय लग सकता है। उन्होंने बताया कि अथॉरिटी की कोशिश है कि जल्द काम शुरू हो। पर्यावरणीय मंजूरी (एनवायरमेंट क्लीयरेंस) मिल गई है। नीरी से संबंधित अनुमति औपचारिकता भी शीघ्र ही पूरी होने की उम्मीद है।
सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. शिरोमणि सिंह ने कहा कि अब टूरिस्ट ही नहीं आम सिविलियन भी हवाई जहाजों का उपयोग करते हैं। आगरा की सीमित एयर कनेक्टिविटी के कारण इन यात्रियों को महाराजपुर हवाई अड्डा ग्वालियर या इंदिरा गांधी एयरपोर्ट होकर आना-जाना पड़ता है। जनरल सेक्रेटरी अनिल शर्मा ने कहा कि सिविल एन्क्लेव के वायुसेना परिसर से शिफ्ट होते ही नागरिक हवाई यातायात बढ़ जाएगा। प्रतिनिधिमंडल में राजीव सक्सेना, असलम सलीमी शामिल रहे।
मिल गई किसानों की सहमति
लगभग 92.50 एकड़ (37.4336 हेक्टेयर) अतिरिक्त जमीन खरीदने का कार्य इसी माह तक पूरा हो जाने की संभावना है। शासन की ओर से 123.59 करोड़ रुपये जिला प्रशासन को दिए जा चुके हैं। 278 किसानों की यह जमीन चार गुना दर पर खरीदी जानी है। इनमें से 246 किसानों से प्रशासन जमीन देने के लिए सहमतिपत्र भी प्राप्त करने की औपचारिकता पूरी हो चुकी है।
सिर्फ एक टैक्सी-वे अपर्याप्त होगा
प्राधिकरण की ओर से तैयार मास्टर प्लान के मुताबिक रनवे से एप्रन और एप्रन से रनवे तक आने-जाने के लिए सिर्फ एक लिंक टैक्सी-वे का निर्माण हो सकता है। भविष्य में यात्रियों की संख्या में वृद्धि के मद्देनजर सिर्फ एक टैक्सी-वे अपर्याप्त होगा, अतिरिक्त व्यवस्था आवश्यक होगी।