आगरा में पुष्पांजलि हॉस्पिटल के निदेशक मयंक अग्रवाल के खाते से 98.70 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर कर निकाल लिए जाने के मामले में एचडीएफसी की संजय प्लेस शाखा के सहायक प्रबंधक ज्ञानेन्द्र सिंह को जेल भेज दिया गया है।
उन्होंने बगैर किसी पड़ताल के 98.70 लाख रुपये बाउचर पर ही जारी कर दिए थे। अभी और भी बैंककर्मी इस जालसाजी में फंस सकते हैं। यह ठगी मूल रूप से डौकी निवासी धर्मेन्द्र ने की है।
उसने एचडीएफसी में खाता इसी के लिए खोला था। निदेशक मयंक अग्रवाल का एचडीएफसी बैंक का खाता आयकर विभाग से अटैच था। इसके बावजूद धर्मेन्द्र द्वारा रकम निकाल ली गई।
बैंक में बाउचर से कोई एक लाख भी निकाले, तो उससे सवाल किए जाते हैं। लगभग एक करोड़ रुपया बगैर किसी सवाल के ही जारी कर दिया गया। यह भी नहीं देखा गया कि यह पैसा मयंक अग्रवाल के खाते से धोखाधड़ी करके ट्रांसफर किया गया है।
पुलिस ने इस धोखाधड़ी में बैंक मैनेजर की मिलीभगत मानी। इसी आधार पर उसकी गिरफ्तारी की गई। उसे कोर्ट में पेश किया गया। वहां से जेल भेज दिया गया।
लगभग एक करोड़ रुपये लेकर फरार हुए धर्मेन्द्र का पुलिस कोई सुराग नहीं लगा पा रही है। वह मूल रूप से डौकी का रहने वाला है। उसके घर दबिश दी तो पता चला कि वह काफी दिन से मथुरा में धोखाधड़ी कर रहा था।
पहले भी जेल जा चुके है मैनेजर
वहां पुलिस पहुंची तो लोगों ने बताया कि वह ठगी कर आगरा चला गया था । यहां जालसाजी कर रहा था। इस पर पुलिस ने आगरा में उसके अन्य ठिकाने पर दबिश दी। यहां भी उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया।
यह पहला मौका नहीं है जब किसी बैंक मैनेजर को धोखाधड़ी में मिलीभगत के लिए जेल भेजा गया हो। पिछले साल ही पंजाब एंड सिंध बैंक की घटिया आजम खां स्थित शाखा के मैनेजर को जेल भेजा गया था।
उस पर आरोप था दो करोड़ रुपये के फर्जी चेक को पास कर देने का। इसका भुगतान दूसरे बैंक ने किया था। चेक क्लोनिंग केजरिए यह रकम एनआरआई तैमूर के खाते से निकाली गई थी। इस मामले की जांच अब सीबीसीआईडी कर रही है।
बैंकों में एक साल में 30 गोलमाल
पिछले साल शहर में ही बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी के 30 केस दर्ज किए गए। इनमें ज्यादातर केस फर्जी कागजात पर लोन जारी कर दिए जाने के हैं।
बगैर किसी पड़ताल के ये लोग दिए गए। इसके अतिरिक्त खातों से रकम खाताधारक के बजाय दूसरे द्वारा निकाल लिए जाने के मामले भी हैं।