प्रदेश के पांच सबसे प्रदूषित शहरों में आगरा पांचवें पायदान पर पहुंच गया है। सोमवार को शहर की हवा में प्रदूषण का स्तर और बढ़ गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एयर क्वालिटी इंडेक्स, एक्यूआई) 408 पर पहुंच गया। 400 से अधिक का एक्यूआई खतरनाक स्तर का माना जाता है। इसके पीछे आगरा में कई जगह हाईवे पर हो रहे निर्माण कार्यों में उड़ने वाली धूल भी एक कारक है।
सोमवार को धूप नहीं निकली। सुबह से छाई धुंध दोपहर बाद तक छाई रही। पारा गिरने के कारण भी हवा की गुणवत्ता में गिरावट आई। रविवार को जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 370 था, वहीं सोमवार को ये बढ़कर 400 से अधिक हो गया। गाजियाबाद में एक्यूआई सबसे अधिक 467 दर्ज किया गया।
जिन शहरों की हवा सबसे अधिक जहरीली मिली उनमें गाजियाबाद, कानपुर, आगरा, नोएडा और मुरादाबाद शामिल हैं। इन सभी का एक्यूआई 400 से 500 के बीच है। इन शहरों की हवा को खतरनाक (सीवियर) कैटेगरी में रखा गया है।
सीपीसीबी के प्रोटोकॉल के मुताबिक सीवियर कैटेगरी की हवा स्वस्थ लोगों को भी बीमार बना सकती है। लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने पर सांस के मरीजों के लिए यह हवा गंभीर हो सकती है। यह एक्यूआई सूक्ष्मकण पीएम 2.5 बढ़ने की वजह से बढ़ा मिला है। पीएम 2.5 के बढ़ने का कारण असुरक्षित निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल और डीजल वाहनों का उपयोग है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोहरे के लगातार छाए रहने से प्रदूषण में इजाफा होगा। धूल और धुएं के कण वायुमंडल में ज्यादातर ऊपर तक नहीं जा पाएंगे। इसलिए अस्थमा और एलर्जी के मरीजों को सावधानी बरतनी होगी।