एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में एक मरीज आया है। हालत गंभीर है। डाक्टर हरकत में आए हैं। बाहर लाइन लगाकर खड़े एंबुलेंस चालक भी एक्टिव हो गए हैं। जैसे गिद्ध की नजर शिकार पर रहती है, वैसे ही इनकी नजरें इमरजेंसी के गेट पर गड़ी हैं। शायद सोच रहे, कब मरीज बाहर आए और फट से लपक लें उसे। तभी एक शख्स बाहर आता है। एंबुलेंस वाले तीमारदार समझ बैठे और उसे घेर लिया है। एक उसका हाथ पकड़कर थोड़ी दूर ले गया। और एंबुलेंस के रेट बताने लगा। उसे नहीं मालूम है कि यह तीमारदार नहीं, संवाददाता है। इस बातचीत में उजागर हुई कमीशनखोरी पर पेश है रिपोर्ट...।
संवाददाता : भइया, कोई अच्छा हास्पिटल है आसपास, यहां तो कोई सुनवाई नहीं है।
एजेंट: यहां को तो हाल बहुत खराब है भाईसाहब, वैसे क्या बीमारी है आपके मरीज को?
संवाददाता: डाक्टर बता रहे हैं पेट में मवाद भर गया है, बड़ा आपरेशन होगा।
एजेंट: ठीक है, टॉप का हास्पिटल है, खर्च भी कम, मेरी सेटिंग है, बिल में 10 परसेंट की छूट भी करा दूंगा।
संवाददाता: फिर भी खर्चा कितना आएगा, कुछ तो बता दो।
एजेंट : अरे भाई, मरीज से बड़ा पैसा थोड़े ही है। चिंता क्याें करते हो, कम से कम में करा दूंगा।
उसकी बातों से जाहिर हो गया कि वह प्राइवेट हॉस्पिटल का एजेंट है। उसे जब बताया गया कि वह रिपोर्टर से बात कर रहा है, तो एक शब्द बोले बगैर नौ दो ग्यारह हो गया।
क्योंकि एसएन के पास व्यवस्था नहीं
एसएन मेडिकल कालेज के पास चार एंबुलेंस हैं। दो वीआईपी ड्यूटी में रहती हैं। दो इमरजेंसी से मरीजों को वार्ड में शिफ्ट करने में। किसी मरीज को एसएन से किसी और अस्पताल जाना हो, तो उसके लिए एंबुलेंस नहीं है। इसी का फायदा निजी एंबुलेंस चालक उठा रहे हैं।
वर्जन
निरीक्षण कर समस्याएं चिह्नित की हैं, स्टाफ को चेतावनी भी दी है। मरीजों को बरगलाने वाले एजेंटों को खदेड़ा जाएगा। एंबुलेंस के लिए क्या बजट है, इसका पता लगाता हूं।
- डा. एसके गर्ग, प्राचार्य
इसलिए उठ रहा है एसएन से भरोसा
सीन : 1- ओटी के गेट पर पड़ा लावारिस शव
सुबह 11:30 बजे इमरजेंसी स्थित ऑपरेशन थिएटर के गेट पर शव पड़ा है। इसका पंचनामा भरवाकर इसे पोस्टमार्टम के लिए नहीं भेजा गया था। काउंटर पर पूछने पर पता चला, यह लावारिस है, कोई रात में छोड़ गया था।
सीन : 2- स्ट्रेचर पर अल्ट्रासाउंड का इंतजार
दोपहर 12:15 बजे। लोहामंडी से आए तीमारदार की बेटी का अल्ट्रासाउंड होना था। अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर उसे स्ट्रेचर पर लेटा दिया। इसी बीच टेक्नीशियन कहीं चले गए। मरीज बाहर ही लेटा रहा।
सीन : 3- ओटी में स्ट्रेचर से गिरा मरीज
फोटो
दोपहर 12:45 बजे। ऑपरेशन के लिए आए हाथरस की अनीता के पति को दो घंटों तक डाक्टर नहीं मिला। वह कराहता हुआ स्ट्रेचर से गिर गया। अन्य तीमारदाराें के साथ अनीता ने उसे खुद ही स्ट्रेचर पर लेटाया।
सीन : 4- मांगी चादर, मिली फटकार
दोपहर 1:30 बजे : सर्जरी विभाग के वार्ड में जर्जर बेड पड़े हैं। यहां तक कि इसके ऊपर चादर तक नहीं है। बिना चादर के ही मरीजों को लेटना पड़ता है। पूछने पर मरीज ने बताया चादर बदलने के लिए कहने पर नर्स फटकार लगाती है।
फोन और लिफ्ट भी खराब
- इमरजेंसी के कंट्रोल रूम का लैंड लाइन फोन महीनों से खराब पड़ा है। लिफ्ट भी काम नहीं कर रही। ओटी में दो ट्यूब लाइट खराब पड़ी हैं।
प्राचार्य ने देर शाम किया निरीक्षण
इमरजेंसी की बदहाली पर संवाददाता ने प्राचार्य से फोन पर बात की तो उन्हाेंने सक्रियता दिखाई। देर शाम इमरजेंसी पहुंचे। ओटी में आपरेशन गंदगी देख सफाई की बात कही, डाक्टरों ने सफाई कर्मचारी की कमी बताई। ट्रामा सेंटर जाकर आपरेशन की स्थिति का जायजा लिया।
प्राचार्य को भी मिली गंदगी
प्राचार्य ने सुबह बाल रोग विभाग का दौरा किया। यहां शिशु सघन चिकित्सा केंद्र देखा। वार्ड में गंदगी देख वह बिफर गए। यहां मरीजों के बिस्तर पर गंदे चादर थे। जनरेटर भी देखा, जो अभी तक चालू की हालत में नहीं मिला।
विभागीय जांच शुरू
बाल रोग विभाग में बिजली जाने पर जेनरेटर न चलाए जाने के चलते तीन नवजात शिशुओं की दम घुटने से हुई मौत पर विभागीय जांच शुरू हो गई। तीन सदस्यीय टीम ने मंगलवार को नर्सिंग स्टाफ और वार्ड ब्वाय से पूछताछ की।
ऐसे चल रहा खेल
70-80
मरीज रोजाना आते हैं एसएन इमरजेंसी में
30-35
ही भर्ती किए जाते हैं मेडिकल कालेज में।
40-45
मरीज 12 घंटे में ही एसएन छोड़ जाते हैं।
10-12
एंबुलेंस हर वक्त एसएन के बाहर खड़ी रहती हैं।
10-15
फीसदी कमीशन निजी अस्पतालों से लेते हैं एंबुलेंस चालक।