प्लाट में भरे बारिश के पानी में नहाते समय हादसा, एमजी रोड पर लोगों ने किया पथराव
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के न आने पर भड़के लोग
तकरीबन चार घंटे बाद निकाला गया, इमरजेंसी में किया मृत घोषित
नालबंद चौराहा पर सोमवार सुबह प्लाट में भरे बारिश के पानी में नहाते समय 15 वर्षीय सारिक के डूबने के बाद एमजी रोड पर चार घंटे बवाल हुआ। पुलिस के सामने ही गुस्साए लोगों ने जाम लगाकर हंगामा किया। वाहनों में तोड़फोड़ की कोशिश की। तकरीबन चार घंटे बाद उसे निकाला गया, इमरजेंसी में उसे मृत घोषित कर दिया गया। इसके बाद गुस्साए लोगों ने फिर जाम लगाने की कोशिश की, तब पुलिस ने लाठियां फटकारकर उन्हें खदेड़ दिया।
नालबंद चौराहा पर नाले के पास डा. अकरम का प्लाट है। सोमवार सुबह बारिश का पानी प्लाट में भर गया। इसमें गहरे गड्ढे भी थे। टीला गोकुलपुरा निवासी सारिक पुत्र शाहिद सुबह 10:30 बजे तीन साथियों के साथ प्लाट में नहाने गया था। गहरे गड्ढे में पानी में सारिक डूब गया। एक किशोर ने उसकी मां सायना को जानकारी दी तो बड़ी संख्या में लोग जुट गए। उन्होंने सारिक की तलाश शुरू की। सूचना पर भी एक घंटे तक पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी नहीं आए तो लोग भड़क गए। एमजी रोड पर जाम लगा दिया। ईंट-पत्थर फेंके। इससे भगदड़ मच गई। तब थाना लोहामंडी पुलिस पहुंची। पुलिस ने दोपहर 12 बजे गोताखोर बुलवाए। इसी बीच फिर लोग भड़क गए। दोपहर एक बजे एमजी रोड के दोनों तरफ जाम लगा दिया। हरीपर्वत और कलक्ट्रेट तक वाहनों की लाइन लग गई। लोगों ने कारों में तोड़फोड़ की कोशिश की। बाइक सवारों को धक्का देकर गिरा दिया। महिलाएं सड़क पर बैठ गईं। पुलिस ने डेढ़ बजे नगर निगम की पंप मशीन से पानी निकलवाया। दो बजे साकिर को बाहर निकाला जा सका। एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में उसे मृत घोषित कर दिया गया। इसकी जानकारी पर लोगों ने फिर हंगामा किया। एसपी सिटी सुशील घुले फोर्स के साथ पहुंच गए। अधिकारियों ने मुआवजे का आश्वासन देकर उन्हें शांत किया।
परिवार में कोहराम
सारिक पानी के प्लांट पर काम करता था। पिता शाहिद मजदूरी करते हैं। एक छोटा भाई शाहरुख है। मां सायना सदमे में हैं। सारिक का परिवार किराये के मकान में रहता है।
सारिक को निकालने में जुट गया पूरा मोहल्ला
सारिक के डूबने की खबर पर मोहल्ले के संतोष, रामरघु, अर्जुन, सौरभ और रमाकांत रस्सी के सहारे पानी में गए। उसकी तलाश की। पुलिस ने गोताखोर महेश और रिंकू को बुलाया था। बाद में रमाकांत सारिक को बाहर निकालकर लाया।