आगरा के सिकंदरा थाने में पुलिस हिरासत में पीटकर राजू गुप्ता की हत्या के मामले में नामजद एक आरोपी अधिवक्ता को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। शाम को आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। हालांकि पुलिस मुख्य आरोपी अंशुल प्रताप और पुलिसकर्मियों को अब तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
21 नवंबर को गैलाना रोड स्थित नरेंद्र एन्क्लेव निवासी राजू गुप्ता ( 30) को चोरी के आरोप में पड़ोसी अंशुल प्रताप और उसके पड़ोसी विवेक परिहार ने पकड़ा था। उसे पुलिस के हवाले कर दिया। 22 नवंबर को राजू गुप्ता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई।
मृतक की मां रेनू लता गुप्ता ने पुलिस की पिटाई से मौत का आरोप लगाया। मामले में अंशुल प्रताप, विवेक परिहार निवासी नरेंद्र एंक्लेव और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था।
पुलिस ने शनिवार को नामजद आरोपी विवेक परिहार को संजय प्लेस से गिरफ्तार कर लिया। वह घटना के बाद से फरार हो गया था। इंस्पेक्टर थाना सिकंदरा ने बताया कि विवेक अधिवक्ता है। उसका संजय प्लेस में आफिस है।
वह आफिस आया था। तभी उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद पुलिस उसे सीधे कोर्ट में ले गई, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अधिवक्ता का पुलिस से यही कहना था कि उसने कुछ नहीं किया।
चार दिसंबर को हो सकता है दरोगा का समर्पण
राजू गुप्ता की हत्या के मामले में दरोगा अनुज सिरोही ने सीजेएम सर्वजीत कुमार सिंह की कोर्ट में सरेंडर प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किया। कोर्ट ने थाने से आख्या के लिए चार दिसंबर की तिथि नियत की है। इसी दिन ही दरोगा सरेंडर भी कर सकता है। अनुज सिरोही अंडर ट्रेनी है।
घटना के बाद से वह गैरहाजिर थे। उनके गिरफ्तार होने से अन्य पुलिसकर्मियों के भी नाम सामने आ सकते हैं। इस हत्याकांड में कम से कम पांच पुलिसकर्मियों के शामिल होने की बात कही गई थी। मगर, सरेंडर प्रार्थनापत्र एक ने ही दिया है। पुलिस अन्य को पुलिस वालों को चिह्नित तक नहीं कर सकी है।
पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी के प्रयास तक नहीं
पुलिस ने अधिवक्ता को पकड़ लिया, लेकिन मुख्य आरोपी अंशुल प्रताप अब तक पकड़ा नहीं जा सका है। वह एक विधायक का रिश्तेदार है। वहीं पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी के प्रयास तक नहीं किए जा रहे हैं। इस वजह से ही वह सरेंडर करने की तैयारी कर चुके हैं।
रिश्तेदारों के यहां रह रही मां
राजू गुप्ता की मां रेनू लता बेटे की मौत से सदमे में हैं। पुलिस ने उनके सामने बेटे की पिटाई की थी। उन्होंने रोका भी था, लेकिन पुलिस नहीं मानी थी। उनकी सुरक्षा में पुलिसकर्मी लगाए गए थे। वह अपने रिश्तेदार के यहां चली गई हैं।