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मिलावट: न दूध शुद्घ न तेल मसाले

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कासगंज। जिला में मिलावट खोरों को न जुर्माने का खौफ है और न ही सजा का डर। एक साल में खाद्य पदार्थों के 65.24 प्रतिशत नमूने फेल हो चुके हैं। यहां न तो दूध शुद्ध मिल रहा है और न ही तेल मसाले।
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जिले में मिलावट का धंधा जोरों पर है। दूध से लेकर हल्दी, मिर्च और अन्य रसोई मसालों में मिलावट हो रही है। लिहाजा बाजार के ही नहीं घर में बन रहे खाद्य पदार्थ भी सुरक्षित नहीं हैं। लोगों की सेहत से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। खाद्य और औषधि प्रशासन विभाग द्वारा लिए गए सैंपल की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। विभाग की टीमों ने एक साल में खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए 305 नमूने लिए। इनमें से 199 नमूने फेल हो गए। इनमें दूध, दूध से बनी पदार्थ, तेल, कचरी, पापड़, ब्रेकी का सामान, मिर्च मसाले, सहित अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट सामने आई। इन नमूनों में से 52 में असुरक्षित श्रेणी की मिलावट सामने आई। विभाग ने सामान्य श्रेणी की मिलावट मिलने पर एडीएम न्यायालय में तथा असुरक्षित श्रेणी की मिलावट मिलने पर एसीजेएम न्यायालय में वाद भी दायर कराए हैं। एडीएम न्यायालय से 83 वादों का निस्तारण करके दोषियों पर 22.40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। विभाग के द्वारा प्रतिवर्ष ही नमूने लेकर जांच कराई जाती है। इसमें जुर्माने भी होते हैं और सजा भी। इसके बाद भी मिलावट नहीं रुक पा रही।
आंकड़ों की नजर
सैंपल 305
फेल 199
जुर्माना 24 लाख
दूध के फेल नमूने 94
अन्य पदाथों के फेल नमूने 105
असुरक्षित श्रेेणी की मिलावट के मामले 52
असुरक्षित श्रेणी का दूध व पदार्थ 28
असुरक्षित श्रेणी के मसाले 6
असुरक्षित श्रेणी के अन्य पदार्थ 7
जिला में खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के लिए विभाग के द्वारा लगातार अभियान चलाया जाता है। सामान्य श्रेणी की मिलावट में जुर्माने तथा असुरक्षित श्रेणी की मिलावट में सजा का प्रावधान है। - नादिर अली अभिहित अधिकारी
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