सात्विक भोजन करें
उन्होंने बताया कि ये महीना हर तीन साल में एक बार आता है। पुरुषोत्तम मास में शुभ कार्य करने पर रोक रहती है, लेकिन ये महीना दान-पुण्य के लिए शुभ माना जाता है। अधिकमास में विष्णुजी की पूजा करने से उनका आशीर्वाद मिलता है। श्रीमद्भागवत कथा सुने और सुनाएं। इस माह में दूध, दही, घी, गेहूं, चावल, केला, आम, अनार, खीरा, ककड़ी, सेंधा नमक, जीरा, चना आदि का सात्विक भोजन करें।
दीपदान का विशेष महत्व
अधिक मास में पौधे लगाना, मंदिर में ध्वजा, दीपदान का विशेष महत्व होता है। अधिक मास में शादी तय कर सकते हैं और शुभ योग देख खरीदारी व नौकरी ज्वाइन कर सकते हैं, लेकिन इसमें तिलक, मुंडन, गृह प्रवेश, यज्ञ, दीक्षा लेना, देव प्रतिष्ठा, विवाह, श्राद्धकर्म आदि नहीं करना चाहिए।
अति आवश्यक हो तो चुनें ये तिथि
श्रावण मास के जुलाई के महीने में 9, 11, 12, 17, 23, 27, 28, 30 और अगस्त 6, 8, 9, 14, 15 को शुभ कार्य कर सकते हैं।
कौन से काम नहीं करने चाहिए-
-पुरुषोत्तम मास में विवाह नहीं करना चाहिए
-मुंडन संस्कार
-नए घर के निर्माण कार्य का शुरुआत
-नए घर में प्रवेश
-यज्ञोपवीत संस्कार
-निजी उपयोग के लिए भूमि खरीदना
-वाहन खरीदना
-नववधू का ग्रह प्रवेश
-नए कुआं या बोरिंग का काम करवाना आदि काम वर्जित किए गए हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
-सुबह जल्दी उठकर नित्य क्रिया से निवृत्त होकर सूर्य देव को जल जरूर चढ़ाएं। दोपहर व शाम को भी सोने से बचें।
-पति-पत्नी प्रेम से रहें, गृहक्लेश में न पड़ें। घर में अशांति से भगवान की कृपा नहीं मिलती।
-घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें क्योंकि लक्ष्मी हमेशा साफ सुथरे घर में ही निवास करती हैं।
-मांसाहार और नशे से बचें। इसके साथ ही अपवित्र चीजों के सेवन से भी बचें।
-माता-पिता व बुजुर्गों का अपमान न करें।