बेटा, लंच पैक नहीं हो पाया, ये पैसे लो कैंटीन से कुछ खा लेना। फिर क्या, कैंटीन में पेटीज, बर्गर, चाऊमीन, कोल्ड ड्रिंग। अभिभावकों की ये लापरवाही बच्चों में फास्ट और जंक फूड का चलन बढ़ा रही है। रही सही कसर आउट डोर गेम से दूरी ने पूरी कर दी। नतीजतन, बच्चे गोलू-मोलू हो रहे हैं। डाक्टर मानते हैं कि 20 फीसदी बच्चे मोटापे का शिकार हैं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. आरएस कपूर ने बताया कि कान्वेंट स्कूल और उच्च घरानों के बच्चों में ये बीमारी तेजी से फैल रही है। पूछताछ में 80 फीसदी बच्चों ने जंक-फास्ट फूड खाना बताया। शारीरिक परिश्रम वाले खेल-कूद में भी बच्चे भाग नहीं लेते। इनका अधिकांश समय टीवी, कंप्यूटर, मोबाइल पर ही बीतता। सचिव डा. मुकेश गोयल बताते हैं कि मोटापा होने से बच्चों की हड्डियां भी कमजोर होने लगती हैं। कोषाध्यक्ष डा. आलोक मित्तल का कहना है कि बच्चों को कंप्यूटर-टीवी पर ज्यादा समय न बिताने दें। शारीरिक परिश्रम वाले खेलों पर जोर दें। पौष्टिक भोजन खाने को दें, जंक-फास्ट फूड से बचाएं।