एडीए की ग्रेटर आगरा आवासीय योजना की कावेरी पुरम और कृष्णा पुरम टाउनशिप यमुना के डूब क्षेत्र में आने से विवाद खड़ा हो गया है। एडीए ने स्पष्ट किया है कि डूब क्षेत्र में किसी तरह का निर्माण नहीं होगा और वहां हरित पट्टी व वॉटर बॉडी विकसित की जाएंगी।
आगरा इनर रिंग रोड स्थित रहनकलां एवं रायपुर में विकसित हो रहा ग्रेटर आगरा प्रोजेक्ट यमुना डूब क्षेत्र में आ गया है। दो टाउनशिप कृष्णा पुरम और कावेरी पुरम प्रभावित हैं। कृष्णापुरम में आंशिक और कावेरी पुरम में कोई निर्माण नहीं होगा। एडीए ने डूब क्षेत्र में शामिल होने के कारण कावेरी पुरम को खाली छोड़ दिया है।
करीब 450 हेक्टेयर में विकसित हो रहे ग्रेटर आगरा में भूखंडों की बुकिंग शुरू हो गई है। पहले चरण में नर्मदा पुरम और गंगा पुरम में भूखंडों की बिक्री होगी। 29 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन होंगे। दस नदियों के नाम पर यहां दस टाउनशिप बसाई जाएंगी। कावेरी पुरम टाउनशिप डूब क्षेत्र में फंस गई है। करीब 50 हेक्टेयर क्षेत्र में अब कोई निर्माण नहीं हो सकेगा। इसके लिए सॉलिड वेस्ट स्टेशन भी डूब क्षेत्र में शामिल है।
कृष्णापुरम का आंशिक भाग भी यमुना डूब क्षेत्र में आ गया है। ऐसे में एडीए इन दोनों टाउनशिप पर अंत में निर्णय लेगा। पर्यावरणविद् शरद गुप्ता का कहना है कि डूब क्षेत्र में प्रोजेक्ट बनाने का एडीए को अधिकार नहीं। जब एडीए वहां टाउनशिप बसाएगा, तो अन्य लोगों को डूब क्षेत्र में निर्माण और कब्जा करने से कैसे रोकेगा। पर्यावरणविद् डॉ. देबाशीष भट्टाचार्य का कहना है कि डूब क्षेत्र में नक्शा पास नहीं हो सकता फिर एडीए की टाउनशिप का नक्शा कैसे बन गया। वहीं, इस संबंध में एडीए उपाध्यक्ष एम अरुन्मोली का कहना है कि डूब क्षेत्र में कोई निर्माण नहीं होगा। उस क्षेत्र में वॉटर बॉडीज विकसित की जाएंगी। हरित पट्टी विकसित होगी।