शमसाबाद रोड की नालंदा टाउन कॉलोनी का 1.45 लाख लीटर सीवर हर दिन खुले मैदान में छोड़ने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने एडीए पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही दो माह के अंदर सीवर लाइन डालने या एसटीपी के जरिए सीवर ट्रीटमेंट के आदेश दिए हैं। एनजीटी ने 6 जुलाई को अगली सुनवाई में एडीए उपाध्यक्ष और अपर मुख्य सचिव नगर विकास को तलब किया है।
एनजीटी ने याचिका पर एडीए, डीएम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कमेटी गठित कर रिपोर्ट मांगी थी, जो एनजीटी में 22 फरवरी को दाखिल की गई। इस रिपोर्ट में कमेटी ने कहा कि सीवर का निस्तारण मानकों के तहत नहीं किया जा रहा है। यह जमीन पर छोड़ दिया गया जो एक नाले से जुड़ी है। यहां सीवर लाइन नहीं है, जबकि नालंदा टाउन के डेवलपर ने एडीए में 1.3 करोड़ रुपये जमा कराए हैं। एक बार 52.80 लाख रुपये और विकास कार्य के लिए 77.68 लाख रुपये एडीए को दिए गए।
एनजीटी बेंच ने अपने आदेश में कहा है कि एडीए अपनी ड्यूटी निभाने में फेल साबित हुआ है। एडीए उपाध्यक्ष को इस मामले में जरूरी कदम उठाने होंगे। एडीए ने 10 मार्च को आचार संहिता खत्म होने के बाद काम शुरू करने के लिए कहा था, लेकिन एनजीटी बेंच ने इस समस्या को पुराना बताया और ढिलाई करार दी। तीन सदस्यीय संयुक्त कमेटी ने एनजीटी से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की सिफारिश की है। तब तक सीवेज को पाइपलाइन से कनेक्ट कर नजदीक के कार्यशील एसटीपी पर छोड़ने के लिए कहा है।
एनजीटी की बेंच ने आगरा विकास प्राधिकरण को कड़ी फटकार लगाते हुए आदेश में कहा है कि गुमराह करने वाले एडीए अधिकारियों के खिलाफ उपाध्यक्ष कार्रवाई करें। अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। एडीए का रुख इस मामले में बेहद गैर जिम्मेदराना है, जिसका असर लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ा है। एडीए उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी, जवाबदेही तय करने के साथ प्राधिकरण पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। यह रकम एडीए अपने उन गुमराह, गलत करने वाले अधिकारियों से वसूलने के लिए स्वतंत्र है।