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कोरोना वायरस की संदिग्ध मरीज और उसके पिता पर दर्ज होगा केस, डीएम ने दिया आदेश

Sun, 15 Mar 2020 03:23 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

इटली से हनीमून मनाकर लौटी इस महिला को जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ा था। महिला का पति बेंगलुरु में कोरोना संक्रमित पाया गया था।
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जिला अस्पताल का आइसोलेशन वार्ड - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इटली से हनीमून मनाकर लौटी कोरोना वायरस की संदिग्ध मरीज और उसके पिता के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा। संक्रमण पाए जाने पर भी युवती ने शुक्रवार को अस्पताल में भर्ती होने से इंकार कर दिया था। 
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उसके पिता ने स्वास्थ्य विभाग की टीम से झूठ बोला था कि वो दिल्ली चली गई है। इस पर पुलिस बुलानी पड़ी थी। पुलिस बल की मदद से युवती को भर्ती कराया जा सका था। 

जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने शनिवार को दोनों पर केस दर्ज कराने के निर्देश मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. मुकेश वत्स को दिए। साथ ही डीआरएम को युवती के पिता के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।
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युवती के पति में कोरोना की पुष्टि

उसे और उसकी रेलवे में कर्मचारी दूसरी बेटी को पहले ही 14 दिन की छुट्टी पर भेजा जा चुका है। युवती के पति बंगलूरू में निजी कंपनी में अधिकारी है। उसमें कोरोना की पुष्टि पहले ही हो चुकी है। युवती उसी केपास से आगरा के छावनी क्षेत्र स्थित मायके में आई थी।

इस बीच वो कई लोगों से मिली। युवती के घर के आस पास के 14 घरों को सेनेटाइज किया गया है। युवती का उपचार एसएन मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में चल रहा है। उसका सैंपल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की लैब में पॉजिटिव आया था। 

हालांकि पुष्टि के लिए दूसरा सैंपल लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी की लैब में भेजा गया। इसकी रिपोर्ट नहीं आई है। डीएम ने बताया कि युवती और उसके पिता पर  एफआईआर दर्ज कराने के लिए सीएमओ को निर्देश दिए गए हैं। 
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यूपी में होगा पहला मामला

कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम में सहयोग नहीं करने पर रेलवे अधिकारी व वायरस ग्रसित संदिग्ध महिला रोगी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का यह प्रदेश में पहला मामला होगा। 

डीएम प्रभु एन सिंह ने बताया कि कोरोना वायरस का कोई भी संदिग्ध रोगी, परिवारिक सदस्य या संपर्क में आया अन्य व्यक्ति जांच नहीं करवाता है। जांच को पहुंची टीम का सहयोग नहीं करता है तो इसे सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोपित मानते हुए आईपीसी की धारा 188 के तहत कारर्वाइ होगी।

123 साल पुराना है महामारी एक्ट

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कोरोना को महामारी घोषित करने के बाद 11 मार्च से देश में केन्द्र सरकार ने 123 साल पुराने महामारी एक्ट को प्रभावित राज्यों में लागू किया है। यूपी में स्वास्थ्य विभाग भी वायरस की रोकथाम के लिए एक्ट के तहत कार्रवाई कर रहा है। इस एक्ट में चार सेक्शन हैं। सेक्शन-2 व 3 में राज्यों को शक्तियां प्रदान हैं। 
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