फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुकदमा दर्ज होने के 33 साल बाद जेल गया आरोपी, अब इंसाफ का इंतजार

Thu, 10 Aug 2017 05:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
विज्ञापन
court
विज्ञापन
कोई भी घोटाला हो जाने पर लोग हल्ला मचाते हैं तो प्रशासन जांच के आदेश दे देता है। जांच में क्या होता है, इसकी एक बानगी देखिए। भूमि अधिग्रहण के एक घोटाले में आरोपी मुकदमा दर्ज होने के 33 साल बाद जेल गया है। वह भी गिरफ्तार नहीं हुआ, बल्कि कुर्की नोटिस जारी होने पर खुद ही कोर्ट के सामने पेश हुआ। अभी आरोप तय होंगे, तब सुनवाई का नंबर आएगा, फैसला तो न जाने कब होगा।
विज्ञापन


आप यह जानकर और चौंक जाएंगे कि केस में चार ही मुल्जिम बनाए गए थे। इनमें से तीन की मृत्यु हो चुकी है। जो शख्स जेल गए हैं, उनकी उम्र 75 साल है यानी सेवानिवृत्ति को डेढ़ दशक हो चुका है। मामला फतेहपुर सीकरी की मंडी मिर्जा खां के लिए हुए अधिग्रहण में घोटाले का है। जांच विजिलेंस के पास है। 

आरोप है कि सरकार ने जमीन अधिग्रहण के लिए जो पैसा दिया, वह किसानों तक पूरा नहीं पहुंचा। सरकार ने ऊंची दर पर जमीन अधिगृहीत की, जबकि किसानों को कम दर से भुगतान किया गया। शिकायत होने पर पुलिस से जांच कराई गई। इसके बाद विजिलेंस को जांच सौंप दी गई।
विज्ञापन

1984 में दर्ज हुआ केस

1984 में केस दर्ज किया गया। इसमें चार आरोपी बनाए गए। ये थे तत्कालीन सहायक भूमि अध्यापित आयुक्त राजपाल सिंह, भूमि अध्याप्ति अधिकारी कमलकांत सिंह, कर अधिकारी कमलकांत और कानूनगो लालता प्रसाद कुलश्रेष्ठ। लालता को छोड़ तीन की मृत्यु हो चुकी है। विजिलेंस के एसपी आनंद कुमार ने बताया कि लालता पर दबाव बनाया गया था। कुर्की नोटिस चस्पा कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने मेरठ स्थित एंटी करप्शन कोर्ट में सरेंडर किया।
विज्ञापन

20 साल बाद भी चल रही जांच

विजिलेंस में कई जांच मुकदमे के 20 साल बाद भी चल रही हैं। इनमें एक मामला फिरोजाबाद के कोयला घोटाले का है। इसके आरोपी फरार हैं। एक केस आगरा के मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सा केंद्र में उपकरण खरीद में हुए घोटाले का है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें