सेक्स और रोमांस के बाद पति-पत्नी के रिश्ते के सबसे नाजुक मोड़ (गर्भावस्था) पर पति की बेरुखी से महिलाओं में तनाव बढ़ रहा है। छोटी-छोटी बातें दांपत्य जीवन में खलल डाल रही हैं। परेशानियां ऐसी कि महिलाएं न्याय मांगने थाने पर पहुंच रही हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसे मामले तेजी से बढ़े हैं जब गर्भवती महिलाएं अपने पति और ससुरालियों की पताड़ना से दुखी होकर महिला थाने पहुंची हों।
मनोचिकित्सक डा. केसी गुरनानी का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान महिला को किसी भी तरह का तनाव नहीं दिया जाना चाहिए। यदि वह खुश रहेगी तो बच्चे तंदुरुस्त होगे और यदि तनावग्रस्त रहेगी तो बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। पिछले एक माह में कई गर्भवती महिलाओं ने महिला थाने में शिकायत की है।
उनका आरोप है कि गर्भावस्था के दौरान पति उनका ख्याल नहीं रखते, जरा-जरा सी बात पर पिटाई करने से भी नहीं चूकते। ऐसे कई मामलों में काउंसलिंग हुई तो अलग-अलग बातें सामने आईं। सात माह की एक गर्भवती ने पुलिस को बताया कि मायके वालों ने पति से ऐसे समय में ख्याल रखने की बात कही तो वह बुरा मान गए। घर जाकर झगड़ा करने लगे।
ये मामले आए सामने
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- फोटो : mirror
- अकबरपुर निवासी शमा नौ माह की गर्भवती है। मंगलवार को वह पति की शिकायत लेकर महिला थाने पहुंची। आरोप है कि छोटी सी बात पर पति ने उसे पीटा।
- किरावली निवासी अफसाना पांच माह की गर्भवती है। गर्भावस्था के दौरान काउंसलिंग के लिए वह थाने आ रही है। इस स्थिति में आपसी विवाद को सुलझाने के लिए उसे थाने के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
- शाहगंज निवासी पूनम जब सात माह से गर्भवती थी तो पति ने उसे मायके भेज दिया। उसने कई बार कहा कि वह पति संग ही रहेगी लेकिन वह नहीं माना। अब वह थाने के चक्कर लगा रही है।
ये हो सकतीं है समस्याएं
Doctor
स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. अभिलाषा प्रकाश का कहना है कि यह समय देखरेख का है। गर्भवती महिला का ज्यादा चलना पैरों में सूजन की समस्या पैदा कर सकता है। तनाव होने से हाई बीपी हो सकता है। जिससे प्री मेच्योर बेबी जन्म लेनी की संभावना अधिक हो जाती है।
डा. शिवानी चतुर्वेदी ने कहा कि यदि मां विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रहीं है तो वह बच्चे के जन्म लेने तक का इंतजार करें। स्वस्थ्य बच्चे को जन्म देने की ओर अपना ध्यान लगाएं। बच्चे के जन्म के बाद इसे सुलझाएं।