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आगराः मिट्टी की ढाय गिरने से तीन बच्चों की मौत, पांच घायल, खेलते समय हुआ बड़ा हादसा

Fri, 01 Jan 2021 12:01 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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मिट्टी की ढाय गिरने के बाद राहत और बचाव कार्य में इस्तेमाल जेसीबी - फोटो : अमर उजाला
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आगरा के सिकंदरा थाना क्षेत्र अंतर्गत रुनकता में गुरुवार को बड़ा हादसा घटित हो गया। रुनकता गांव में गुरुवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे मिट्टी की ढाय गिर जाने से इसमें दबकर तीन बच्चों की मौत हो गई और पांच गंभीर रूप से घायल हो गए। ये बच्चे चार दिन पहले तालाब के लिए खोदवाए गए 15 फुट गहरे गड्ढे में खेल रहे थे। 
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जेसीबी से खोदाई कराकर बच्चों को निकाला गया। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान माया देवी पर तालाब खोदाई कराने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग-दो जाम करने की कोशिश की। पुलिस ने रोका तो चौकी का घेराव कर दिया।


सिकंदरा थाना के प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार ने बताया कि मृतकों में रुनकता के ही हरिओम की बेटी नैना ( तीन ), जितेंद्र की बेटी मैडुकी ( सात)  और कप्तान सिंह का बेटा दक्ष ( दस ) हैं। 
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जितेंद्र की बेटी टैंटी (10), कप्तान सिंह का बेटा अंकित (13), पप्पू का बेटा अंश (09), गिर्राज का बेटा पीयूष ( 09) और पप्पू का बेटा अंशू ( 09) घायल हैं। घायलों को एसएन मेडिकल कॉलेज, नयति और प्रभा हास्पिटल में भर्ती कराया गया है।

हाथों से मिट्टी खोदी... बाइक  से अस्पताल ले गए... पर तीन बच्चे बच नहीं पाए

आठ बच्चों पर मिट्टी की ढाय गिरते ही गांव के 100 से ज्यादा लोग उन्हें बचाने के लिए दौड़ पड़े। इनमें महिलाएं भी थीं। कोई हाथ से मिट्टी खोद रहा था तो कोई फावड़े थे। जेसीबी से खोदाई के बाद बच्चे निकले तो परिजन उन्हें लेकर अस्पताल के लिए भाग लिए। कोई बाइक से ले गया तो कोई ऑटो से, पूरी कोशिश के बावजूद तीन बच्चों की जान बच नहीं पाई।

जिसे जो मिला उससे खोदाई शुरू कर दी, जेसीबी के आने तक दो-तीन फुट मिट्टी हटा ली थी
ये बच्चे जब खेल रहे थे तो पास के मकान की छत से दो महिलाएं इन्हें देख रही थी। उन्होंने बच्चों की चीख सुनी तो शोर मचा दिया। बस फिर क्या था, लोग फावड़े, कुदाल लेकर चल दिए। मौके पर पहुंचे जितेंद्र ने बताया कि गड्ढा 15 फुट गहरा था। मिट्टी में दबे बच्चों के माता-पिता भी आ गए थे।

सभी लोगों ने मिट्टी हटाने की कोशिश की। दो से तीन फुट मिट्टी हटा ली थी लेकिन बच्चे नजर नहीं आए, तब जेसीबी लाए। इससे मिट्टी हटाई गई। औरतें चिल्ताती रहीं, भैया जरा देखकर, कहीं बच्चे को चोट न लग जाए मशीन से। बच्चे जैसे ही निकले, लोग इन्हें लेकर भाग लिए।
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एक घंटे तक मिट्टी में दबे रहे बच्चे
तीन बच्चों की जान नहीं बच जाने की वजह दम घुट जाना रही। एसएन मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने बताया कि वे मृत अवस्था में लाए गए थे। मौके पर मौजूद हरीश ने बताया कि बच्चे एक घंटे बाद निकाले जा सके थे। ये दोपहर साढ़े तीन बजे दबे थे जबकि निकाले गए साढ़े चार बजे के करीब। परिजन पहले दिल्ली रोड के निजी अस्पतालों में ले गए। तीन बच्चों की सांस टूट चुकी थी। इन्हें लेकर परिजन जैसे ही एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंचे, वहां चिकित्सक ने कहा, इनकी मृत्यु हो चुकी है।

देरी से आई एंबुलेंस खाली लौटी 
बच्चों के मिट्टी में दब जाने पर लोगों ने पहले उन्हें निकालने की कोशिश की। इसके बाद एंबुलेंस को फोन किया। एंबुलेंस 30 मिनट में नहीं आई। इंतजार करने के बजाय लोग बच्चों को बाइक, ऑटो और कार से लेकर भाग लिए। इसके बाद एंबुलेंस आई लेकिन तब तक बच्चों को अस्पताल ले जाया जा चुका था। 
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