15 साल की उम्र में आईआईटी में प्रवेश पाकर सुहागनगरी का नाम रोशन करने वाले अभय बचपन से ही होनहार रहे हैं। अभय के पिता ने बताया कि आजतक उन्हें कोई पाठ दोबारा समझाने की जरूरत नहीं पड़ी। अभय की कैंचिंग पावर बहुत तेज है। यही कारण है कि आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर भी उनकी हाजिर जवाबी देखकर अचंभित रह गए थे।
अमर उजाला से खास बातचीत में पिता मुकेश अग्रवाल ने बताया कि अभय को हमेशा से ही पढ़ने का शौक रहा है। बचपन में जब उनकी मां एकता अग्रवाल बड़े भाई को पढ़ाती थीं तो अभय भी साथ बैठकर ही कई पाठ याद कर लेते थे। साथ ही मां ने जब उन्हें भी पढ़ाना शुरू किया तो कभी A, B, C, D... तक दोबारा सिखाने की जरूरत नहीं पड़ी।
मुकेश अग्रवाल के अनुसार जब वे अपने बेटे को जेईई एडवांस की काउंसलिंग के लिए आईआईटी कानपुर लेकर गए तो वहां मौजूद आईआईटी के डायरेक्टर और प्रोफेसर भी अभय को देख चौंक गए। इसके बाद उन्होंने अभय से सवाल किए तो अभय ने भी हर सवाल का सटीक उत्तर दिया। यहां तक कि अंग्रेजी में पूछे गए प्रश्न को अंग्रेजी में और हिंदी में पूछे गए प्रश्न का हिंदी में उत्तर दिया। यह देख आईआईटी के प्रोफेसर भी अचंभित रह गए।
बता दें कि जेईई एडवांस में 2467वीं रैंक (जनरल) हासिल करने वाले फिरोजाबाद के अभय अग्रवाल को काउंसलिंग के बाद आईआईटी बीएचयू में मैकेनिकल ब्रांच दी गई है। हालांकि उन्होंने रुड़की आईआईटी में मैकेनिकल ब्रांच के लिए फ्लोट (परिवर्तन के लिए) किया है।