आगरा के फ्रीगंज क्षेत्र में सूखे नाले में प्लास्टिक के डिब्बे में नवजात का शव मिलने की घटना को 48 घंटे भी नहीं बीते थे कि ममता का गला घोंटने वाली एक घटना मंगलवार को ग्राम चितौरा में सामने आई। खेतों में एक नवजात शिशु लावारिस हालत में पड़ा मिला। झाड़ियों और कांटों के बीच पॉलिथीन में लिपटे मासूम की सिसकियों ने वहां काम कर रहे मजदूरों का ध्यान खींचा, जिसके बाद उसकी जान बचाई जा सकी। मौके पर मौजूद लोग उस मां पर सवाल उठा रहे थे, जिसने अपने अंश को मरने के लिए छोड़ दिया।
चितौरा निवासी मानसिंह ने बताया कि ग्रामीण लाखन सिंह के खेत में कुछ मजदूर खरबूजे की फसल तोड़ रहे थे। इसी दौरान उन्हें बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। जब वे पास पहुंचे, तो देखा कि एक नवजात शिशु पॉलिथीन में लिपटा हुआ कांटों के बीच पड़ा है। मासूम के शरीर पर मिट्टी लगी थी और चींटियां उसे नोच रही थीं।
सूचना मिलते ही ग्रामीण नीतू देवी मौके पर पहुंचीं और ममता दिखाते हुए तुरंत बच्चे को गोद में उठा लिया। उन्होंने मासूम की साफ-सफाई की और उसे लेकर शमसाबाद थाने पहुंचीं। बाल कल्याण अधिकारी योगेश कनाैजिया और पुलिस के साथ नवजात को सीएचसी ले गए। डॉ. मृदुल शर्मा ने नवजात की जांच की। डॉक्टर ने बताया कि बच्चे का वजन काफी कम है। स्थिति गंभीर होने के कारण उसे वार्मर मशीन में रखा गया है। प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए आगरा रेफर कर दिया गया।
अस्पताल में उमड़ी भीड़
जैसे ही खेत में बच्चा मिलने की खबर फैली, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर ग्रामीणों और राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई। हर कोई उस मां और परिजन को कोस रहा था, जिसने मासूम को इस तरह मौत के मुंह में छोड़ दिया। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है कि आखिर इस नवजात को वहां कौन छोड़कर गया।