आगरा में किशोरी का अपहरण और दुष्कर्म करने के मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। पीड़ित ने अदालत से गुहार लगाई, जिस पर पॉक्सो एक्ट की विशेष न्यायाधीश सोनिका चौधरी ने थाना प्रभारी खेरागढ़ इंद्रजीत सिंह, दरोगा इब्राहिम खान, हरेंद्र सिंह, खेरागढ़ निवासी आरोपी अरबाज अली, अलीम और दो अज्ञात युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश पुलिस आयुक्त को दिए हैं।
फरियादियों की सुनवाई न करने का यह मामला तीन माह पुराना है। पीड़िता के पिता ने अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि उनकी बड़ी पुत्री 16 साल की और छोटी 13 वर्ष की है। दोनों पुत्रियां 3 फरवरी 2025 की सुबह 9 बजे घर से बाजार के लिए निकली थीं। देर शाम तक वापस लौटकर घर नहीं आईं। तब उन्होंने आसपास के इलाके में तलाश किया। मगर कहीं भी पता नहीं चल सका।
दो दिन बाद 5 फरवरी को खेरागढ़-कागारौल चौराहे पर घबराई हुई हालत में छोटी पुत्री मिली। उसने बताया कि बाजार जाने के दौरान बड़ी मस्जिद कब्रिस्तान के पास से आरोपी अरबाज, अलीम और दो अज्ञात युवकों ने जबरन ऑटो में बैठा लिया। डराकर अपनी बहन की ससुराल नुनिहाई ले गए। वहां आरोपी अरबाज ने दीदी के साथ दुष्कर्म किया। उसके साथ भी दुष्कर्म की कोशिश की गई, लेकिन रात को मौका देखकर वह बिजलीघर चौराहे होते हुए आ गई। दीदी आराेपियों के कब्जे में है।
पुलिस ने दर्ज नहीं की रिपोर्ट, न्याय से वंचित किया
पीड़िता के पिता के मुताबिक वह छोटी पुत्री के साथ खेरागढ़ थाने पर मुकदमा दर्ज कराने पहुंचे। पुलिस ने उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की। आराेपियों के साथ मिलकर पुलिस ने सरकारी पद का दुरुपयोग कर घटना को दबाने की कोशिश की। सुनवाई के बाद पॉक्सो एक्ट विशेष न्यायाधीश की अदालत ने माना कि लोकसेवक होने के बाद भी अपराध की सूचना मिलने पर विधि के अधिरोपित दायित्व का गंभीरता पूर्वक निर्वहन न कर पद का दुरुपयोग किया। पुलिसकर्मियों ने अपने कर्तव्यहीन आचरण से न केवल किशाेरियों को न्याय से वंचित किया, बल्कि अदालत को भी गुमराह करने की कोशिश की।