आगरा। कीठम स्थित सूर सरोवर पक्षी विहार में बबूल का जंगल हटाकर भारतीय वनस्पतियां लगाने की मांग पर वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने किसी विशेषज्ञ संस्थान से बबूल के पेड़ हटाने से होने वाले अच्छे और बुरे प्रभाव का अध्ययन कराने का सुझाव दिया है। मुख्य वन संरक्षक वन्य संजीव कुमार ने प्रमुख सचिव को इस संबंध में रिपोर्ट भेजी है।
कीठम सूर सरोवर पक्षी विहार करीब 800 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। 500 हेक्टेयर क्षेत्र में बबूल का जंगल हैं। गंगा प्लेन बायोग्राफिक जोन स्थित यह पक्षी विहार पर्यावरण दृष्टि से संवेदनशील वन क्षेत्र है। मुख्य वन संरक्षक की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019-20 में हुए सर्वे के अनुसार पक्षी विहार में प्रासोपिस जूलीफ्लोरा, यूकेलिप्टस, केसिया सेमिया सहित 299 प्रजातियों के पेड़-पौधे हैं। यहां दुनियाभर से प्रवासी पक्षी आते हैं। सूर सरोवर पक्षी विहार रामसर साइट भी है।
काली बाड़ी निवासी पर्यावरणविद डॉ. देबाशीष भट्टाचार्य ने मुख्यमंत्री और वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को पत्र लिख सूर सरोवर से बबूल का जंगल हटाकर भारतीय वनस्पतियां लगाए जाने की मांग रखी थी जिसे लेकर मुख्य वन संरक्षक ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी है।
04जेएनडी16-नगर कीर्तन की अगुवाई करते हुए पंज प्यारे। स्रोत संगत
04जेएनडी16-नगर कीर्तन की अगुवाई करते हुए पंज प्यारे। स्रोत संगत